तैराकी में कई ने बनाया है कॅरियर, कई को मिली नौकरी
राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में यहां के तैराक करते हैं प्रतिनिधित्व
संसाधन मिले तो यहां के तैराकों के लिए ओलंपिक मेडल भी दूर नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
हाटा (कुशीनगर)। नगर पालिका हाटा क्षेत्र के रधिया देवरिया का नाम आते ही वहां का तालाब और उसमें से निकले तैराक बरबस ही याद आ जाते हैं। ग्रामीण परिवेश का बेतरतीब तालाब, जिसमें न तो तैराकी के लिए कोई रैंप है और न ही पक्का रिर्टनिंग वाल, फिर भी तैराकी से जुड़ा शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो इस तालाब को न जानता हो। उसे पहचान दिलाई है प्रतिदिन यहां अभ्यास कर प्रदेश और देश स्तर पर नाम कमाने वाले तैराकी के दीवानों ने। यहां के तैराकों में सिर्फ युवक ही नहीं, युवतियां भी शामिल हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर अपना दमखम दिखा चुकी हैं।
सुबह शाम स्थानीय कोच बच्चों को तैराकी के लिए तैयार करते हैं। यहां के तैराक एक तरफ प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की तैराकी में भाग ले चुके हैं। वहीं, तैराकी के बल पर रेलवे, आर्मी सहित अन्य विभागों में अच्छे पदों पर नियुक्त भी हुए हैं। कई युवक और युवतियां तो तैराकी को ही अपना कॅरियर बनाकर विभिन्न जगहों पर कोच के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
तालाब में पांच साल की उम्र से तैराकी करने वाली प्रतीक्षा ने बताया कि मैं प्रतिदिन सुबह-शाम सीनियरों के साथ तैराकी सीखती हूं। मेरा सपना है कि मैं भी ओलंपिक में जाऊं और पदक लाऊं।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके गोलू यादव ने बताया कि तालाब में कुछ खामियां हैं, जिसकी वजह से हम लोग नेशनल में मात खा जाते हैं। इस तालाब में टर्निंग प्वाइंट की व्यवस्था नहीं है, जिससे हम लोगों के अभ्यास में कमी रह जाती है।
इसी तालाब में तैराकी के दांवपेच सीखकर रेलवे में बतौर कोच नौकरी करने वाले भाष्कर यादव ने बताया कि तालाब में तैरने वाले सैकड़ों बच्चे और बच्चियों को तैराकी के दम पर सरकारी नौकरी मिल चुकी है।
भूपेंद्र उपाध्याय भी इसी तालाब से तैराकी सीखकर पूर्वोत्तर रेलवे के कोच हैं। वहीं, अशोक प्रजापति रेलवे के पूर्व खिलाड़ी रह चुके हैं। अमरनाथ यादव भी रेलवे में खिलाड़ी हैं। आनंद यादव आर्मी ग्रीन स्पोर्ट के कोच व प्रियंका यादव बीएचयू में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर नियुक्त हैं।
उन्होंने इसी तालाब में तैराकी सीखी है। तैराकी में कॅरियर बनाने वाले प्रमोद यादव नोएडा में खुद की तैराकी क्लास चलाते हैं तो सोहन चौहान फरीदाबाद के एकडमी में कोच हैं।
यहां के तैराकों को एक बात की हमेशा टीस होती है कि यहां के तैराकों में प्रतिभा होने के बाद भी वह सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिसकी जरूरत है। क्षेत्र में तमाम ऐसे तालाब हैं, जहां ओलंपिक स्तर के तरणताल बनवाए जा सकते हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं देता है। यहां के तैराकों का कहना है कि अगर हम लोगों को अच्छे तरणताल मिल जाए तो यहां के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय पदक ला सकते हैं।