कुशीनगर। रायबरेली के सलोन में हुए प्रमाणपत्र फर्जीवाड़े की जांच एटीएस और पुलिस कर रही है कि जिले के भी कुछ गांवों में जन्म प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं। इसमें तमकुहीराज ब्लॉक के एक कंप्यूटर ऑपरेटर का नाम प्रकाश में आया है। उसे सेवरही ब्लॉक में स्थानांतरित कर दिया गया है। डीपीआरओ ने उससे स्पष्टीकरण तलब किया है। सूत्रों की मानें तो कंप्यूटर ऑपरेटर ने विभाग की आईडी पासवर्ड को न केवल बदलकर जन्म प्रमाणपत्र जारी किया हैं, बल्कि कई सीएसपी और सीएससी संचालकों को दे दिया था। संजीव सिंह से भी इसका कनेक्शन होने की चर्चा है। संजीव की गिरफ्तारी के बाद यह मामला प्रकाश में आया है।
तरायासुजान के सीएसपी संचालक संजीव कुमार सिंह और महराजगंज जिले के रहने वाले विशुनपुरा सीएचसी में तैनात डाटा ऑपरेटर सतीश सोनी की गिरफ्तारी के बाद अफसर सक्रिय हो गए हैं। जन्म प्रमाणपत्र पोर्टल पर एक सचिव की गड़बड़ी पाए जाने पर सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने डीपीआरओ को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए कहा। जांच में तमकुहीराज ब्लॉक में स्वच्छ भारत मिशन के तहत तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका संदिग्ध मिली। डीपीआरओ ने तत्काल प्रभाव से उसे सेवरही ब्लॉक स्थानांतरित कर तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा। लेकिन, सात दिन बाद भी कंप्यूटर ऑपरेटर ने स्पष्टीकरण नहीं दिया है। इससे विभागीय अधिकारियों का शक गहरा गया है।
डीपीआरओ ने सभी ग्राम विकास अधिकारियों को एक साल के अंदर जारी जन्म प्रमाणपत्रों की जांच कर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही ग्राम सचिवों को आईडी पासवर्ड को अपडेट कर पासवर्ड बदलने के निर्देश दिए हैं। इसमें लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसको लेकर ग्राम विकास अधिकारियों में खलबली मची है।
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यहां भी विकास विभाग संदेह के घेरे में
जिले में भी रायबरेली जैसे फर्जीवाड़े के संकेत मिल रहे हैं। तमकुहीराज तहसील के एडीओ पंचायत और वीडीओ पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। सवाल तो सचिव पर भी है, लेकिन उन्होंने जानकारी होने पर इसकी सूचना आला अधिकारी को दे दी थी। जबकि, विकास विभाग के तहसील स्तर के जिम्मेदारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसमें लॉगिन आईडी पासवर्ड भी एडीओ पंचायत के ही थे। सूत्रों की मानें तो इसमें एडीओ पंचायत और वीडीओ स्तर पर लापरवाही बरती गई है।
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कंप्यूटर ऑपरेटर से स्पष्टीकरण मांगा गया था। इस संबंध में अबतक कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। सभी वीडीओ को एक साल के अंदर जारी जन्म प्रमाणपत्रों की जांच के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। -आलोक कुमार प्रियदर्शी, डीपीआरओ, कुशीनगर