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Kushinagar News: 42 साल बाद भी चमक नहीं बिखेर सका सूर्य मंदिर

Sun, 30 Jul 2023 11:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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चार दशक बाद सोमवार को मनेगा सूर्य प्राकट्य दिवस पर उत्सव, लोगों में उत्साह
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संवाद न्यूज एजेंसी

पडरौना। सूर्य मूर्ति प्राकट्य उत्सव में 31 जुलाई को 42 वर्ष पहले सूर्य मूर्ति का प्रकटीकरण हुआ था। इसके चार दशक के बाद यह पहला मौका है, जब इस उत्सव को धूमधाम से मनाया जा रहा हैं। इन वर्षों में कभी सरकार की तरफ से इस मंदिर के विकास पर कोई पहल नहीं हुई, जिससे सूर्य मंदिर उपेक्षा का शिकार रहा। उत्तर भारत के इकलौते गुप्तकालीन सूर्य मंदिर का विकास शून्य है।
तुर्कपट्टी महुअवा स्थित ऐतिहासिक सूर्य मंदिर पर्यटन विभाग से उपेक्षित है। कहा जाता है कि महुअवा गांव के सुदामा ने सपना देखा। उन्होंने देखा कि जिस जगह पर सोए हैं, उसके नीचे भगवान सूर्य की मूर्ति है। उन्होंने इस सपने पर ध्यान नहीं दिया। कुछ दिन बाद परिवार में घटना घटी और वह स्वप्न के प्रति गंभीर हो गए।
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31 जुलाई 1981 को सूर्य ग्रहण लगा था। उसी दिन पूर्व ग्राम प्रधान मथुरा शाही की अगुवाई में गांव के लोगों ने खुदाई की थी। खुदाई में यहां दो प्रतिमाएं मिलीं। इनमें से एक बलुई मिट्टी और दूसरी नीलमणि पत्थर की थी। इतिहासकारों ने इसे गुप्तकालीन बताया था।
वर्ष 1985 में पहली बार संस्कृति विभाग व स्थानीय ग्रामीणों की सहयोग से शुरू हुआ सूर्य महोत्सव वर्ष 1992 में बंद कर दिया गया। वर्ष 1998 में तत्कालीन डीएम वीके श्रीवास्तव के प्रयास से पर्यटन विभाग ने 25 लाख की लागत से मंदिर का सुंदरीकरण कराया। काले नील मणि पत्थर से निर्मित सूर्य प्रतिमा की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों में है।
यहां लचर सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाकर पुरातन धरोहरों को चोरों ने 24 अप्रैल 1998 को मूर्ति चुरा ली थी। क्षेत्रीय जनता के दबाव पर कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने दो वर्षों के बाद प्रतिमा को बरामद कर लिया। तब कुछ दिन तक दो सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई, फिर सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे है।
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फिल्म की शूटिंग का भी पसंदीदा स्थान रहा है सूर्य मंदिर


तुर्कपट्टी महुअवा की ऐतिहासिकता बस पर्यटन महत्ता से नहीं है। इसकी ख्याति दूर-दूर तक है। यह मंदिर अभिनेताओं, अभिनेत्रियों और फ़िल्म डायरेक्टर के लिए पहली पसंद वाली जगह रही है। 2005 में अभिनेता रवि किशन ने प्रीत न जाने रीत की पहली शूटिंग भी यही की थी। उसके बाद अन्य अभिनेताओं ने यहां फ़िल्म की इच्छा जताई, लेकिन उसके बाद इसकी महत्ता में कमी के कारण फ़िल्म निर्माताओं का झुकाव कम हो गया।
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