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Kushinagar News: चार साल पहले मिली स्वीकृति, फिर भी रेलमार्ग से जोड़ने का नहीं शुरू हुआ काम

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सरदार नगर से हेतिमपुर तक जाने वाली ट्रांबे लाइन।संवाद
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गोरखपुर से कुशीनगर होते हुए पडरौना तक बिछाई जानी है रेल लाइन
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गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली रेलपथ से जुड़े तो बढ़ जाएगी सैलानियों की तादाद
मुख्यमंत्री कर चुके हैं निर्माण शुरू कराने की घोषणा, प्रधानमंत्री से मिलकर सांसद भी कर चुके हैं धन की मांग

संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए करीब चार साल पहले प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक परियोजना शुरू नहीं हो सकी है। यह रेललाइन गोरखपुर से कुशीनगर होते हुए पडरौना तक 64.5 किलोमीटर लंबाई में बनाई जानी है। इस परियोजना को वर्ष 2018-19 में प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। फिर भी परियोजना शुरू नहीं हो सकी है।
परियोजना के लिए धन मिल जाए तो कुशीनगर रेल मार्ग से जुड़ जाएगा। कुशीनगर हवाई और सड़क मार्ग से तो जुड़ ही चुका है। इससे न केवल भगवान बुद्ध का दर्शन करने के लिए आने वाले सैलानियों को सीधे पहुंचने में सहूलियत होगी, बल्कि यह जनपद मुख्यालय पडरौना और मंडल मुख्यालय गोरखपुर से रेलमार्ग से जुड़ जाएगा। कुशीनगर पहुंचने का सीधा रेलमार्ग न होने के कारण भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों की यात्रा पर आने वाले बहुत से सैलानी लुंबिनी और सारनाथ में दर्शन-पूजन कर लौट जाते हैं।
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वर्ष 2017 में हुआ था सर्वे
गोरखपुर से कुशीनगर होते हुए पडरौना तक 64.5 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना के लिए वर्ष 2017 में सर्वे हुआ था। वर्ष 2018-19 में इसे प्रशासनिक स्वीकृति मिली। इस परियोजना की लागत 1,345 करोड़ से बढ़कर अब 1,467 करोड़ रुपये कर दी गई है। परियोजना स्वीकृत होने के बावजूद कार्य शुरू नहीं हो पा रहा। परियोजना के मद में बजट दिलाने की खातिर 20 मार्च 2021 को सांसद विजय कुमार दुबे प्रधानमंत्री से भी मिल चुके हैं। अक्तूबर 2021 में मुख्यमंत्री इस रेल लाइन को बनवाने की घोषणा कर चुके हैं।
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सिर्फ सड़क मार्ग से ही आते है देसी-विदेशी सैलानी
कुशीनगर तक पहुंचने का सड़क मार्ग ही माध्यम है। यात्री बसों और निजी वाहनों से यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। ऐसे में लुंबिनी, सारनाथ आने वाले यात्री आवागमन की सीधी सुविधा न होने के कारण बुद्ध की महारिनिर्वाण स्थली नहीं पहुंच पाते, जबकि कुशीनगर एक्सप्रेस ट्रेन भी संचालित होती है, जो गोरखपुर से लौट जाती है।
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केंद्रीय वित्त मंत्री भी कर चुकी हैं रेलमार्ग से जोड़ने की घोषणा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीता रमन इस वर्ष 19 फरवरी को संसद में प्रस्तुत बजट के दौरान कुशीनगर को रेल लाइन से जोड़ने की घोषणा कर चुकी हैं। 64.5 किलोमीटर लंबी इस रेललाइन के लिए 2019 में 1,359 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। प्रस्तावित रेललाइन गोरखपुर से कुशीनगर होते हुए पडरौना को जोड़ने वाली है। अब इस परियोजना की लागत 1,467 करोड़ रुपये हो गई है।
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प्रधानमंत्री से मिल चुके हैं सांसद
कुशीनगर के सांसद विजय कुमार दुबे 20 मार्च 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके कार्यालय पर मिले थे। उन्हें पत्रक सौंपकर इस परियोजना के लिए धन उपलब्ध कराने की मांग की थी। उस समय उन्होंने बताया था कि परियोजना के पूर्ण होने से बुद्धनगरी कुशीनगर समेत पूरे जनपद में पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलेगा। बौद्ध सर्किट की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। चार बार यह मामला संसद में उठा चुके हैं और मुख्यमंत्री एवं रेल मंत्री को पत्र सौंपकर कार्य जल्द शुरू कराने की मांग कर चुके हैं।
... लुंबिनी (नेपाल) से 140 किलोमीटर दूर
भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर उनके जन्म स्थान लुंबिनी (नेपाल) से 140 किमी दूर है। दूसरे देशों से आने वाले बौद्ध धर्म के अनुयायी दोनों जगहों पर जाना चाहते हैं। रेल मार्ग से कुशीनगर को जोड़ने से पर्यटकों को सहूलियत होगी। कुशीनगर का अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट भी क्रियाशील हो चुका है। लिहाजा, भारतीय व विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।
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प्रस्तावित रेलमार्ग पर बनने वाले स्टेशन
इस प्रस्तावित रेल मार्ग पर सरदारनगर, बनचरा, रामपुर सोहरौना, हाटा, हेतिमपुर, कुशीनगर, कसया, पथरदेवा व पडरौना जिला मुख्यालय पर स्टेशन प्रस्तावित हैं। हाटा में आजादी के 74 साल बीतने के बाद भी हाटा तहसील क्षेत्र के लोगों को भगवान बुद्ध की निर्वाण स्थली कुशीनगर को रेल लाइन से जुड़ते हुए देखने का सपना अभी तक पूरा न हो सका। जिससे क्षेत्र के लोगों में काफी निराशा देखने को मिल रही है।
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सरदारनगर से हेतिमपुर तक बनी थी ट्रांबे रेललाइन
सरदारनगर से हेतिमपुर तक ट्रांबे लाइन थी। इसे गन्ना ढोने के लिए बनाया गया था। बताया जाता है कि इस सुविधा के लिए उस समय के किसानों ने अपनी जमीन मिल प्रबंधन को मुफ्त में दे दी थी। अब यह रेललाइन काफी हद तक उजड़ चुकी है, लेकिन रेललाइन का मार्ग यथावत है। रेलवे लाइन बिछाने के लिए पर्याप्त जमीन है। यहां तक किबंचरा और करमहा में प्लेटफार्म भी था। जमीन इतनी है कि पूरा रेलवे स्टेशन बन सकता है। इस रेललाइन का काम पूरा हो जाने से आवागमन सुगम होगा तथा रेलवे स्टेशनों के बन जाने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
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गोरखपुर से पडरौना के रेलमार्ग से जुड़ जाने से आवागमन सुगम होगा। कुशीनगर जनपद मुख्यालय और मंडल कार्यालय से जुड़ जाएगा। विद्यार्थियों को आवागमन में सहूलियत होगी। रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
शैलेंद्र दत्त शुक्ल, प्रधानाचार्य
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गोरखपुर से कुशीनगर होते हुए पडरौना तक रेलमार्ग से जोड़ने की परियोजना बहुत पुरानी है। कई साल से सुन रहे हैं, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो सका। पडरौना न भी जुड़े तो गोरखपुर से कुशीनगर को जोड़ देना चाहिए। तब भी आवागमन सुविधाजनक हो जाएगा।
दीपनारायण अग्रवाल, व्यवसायी
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जब हम लोगों को पहली बार जानकारी हुई कि सरदारनगर-हेतिमपुर ट्रांबे लाइन को रेल लाइन में बदलने का प्रस्ताव सरकार ने पास कर दिया है तो पूरे इलाके के लोग खुश हो गए थे, लेकिन साल दर साल बीत जाने के बाद भी इस रेल लाइन को लेकर कोई कार्य जमीन पर होता नहीं दिख रहा है। इससे निराशा हो रही है।
जितेंद्र यादव, करमहा
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ट्रांबे लाइन को रेल लाइन में बदलने के लिए सर्वे हो चुका है। प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, फिर भी निर्माण शुरू नहीं हुआ है। अभी यह परियोजना कागजों में दौड़ रही है। जमीन पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है।
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अजय मिश्रा, पैकौली
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कोट
सरदारनगर से कुशीनगर होते हुए पडरौना तक रेल परियोजना के लिए मैंने संसद से लेकर मुख्यमंत्री, रेलमंत्री और प्रधानमंत्री के समक्ष मसला रखा। इन प्रयासों की देन रही कि बजट सत्र में केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस परियोजना के लिए दस करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की थी। यह पूरी परियोजना 1,467 करोड़ रुपये की है, जिसमें 646 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण पर खर्च होंगे। नए वित्तीय वर्ष में इस पर काम शुरू होने की संभावना है।
विजय कुमार दुबे, सांसद, कुशीनगर
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