- कसया के अंकित श्रीवास्तव ने कड़ी मेहनत से तैयार किया था
संवाद न्यूज़ एजेंसी
साखोपार। कसया के अंबेडकर नगर निवासी अंकित श्रीवास्तव ने आईआईटी कानपुर में शोध के दौरान भू-परीक्षक यंत्र तैयार किया था। इस यंत्र को भारतीय पेटेंट कार्यालय ने अधिनियम 1970 के तहत 20 साल के लिए 459942 संख्या से पेटेंट किया है। अंकित का यह यंत्र मिट्टी की सेहत महज 40 सेकेंड में बताएगा।
अंकित के इस यंत्र से अब किसानों को खेतों के मिट्टी की जांच के लिए भटकने की जरूरत नहीं होगी। इससे जांच की मिट्टी की रिपोर्ट खेत में ही 40 सेकंड में मोबाइल पर प्राप्त हो जाएगी। इस जांच के बाद किसान जरूरत के मुताबिक उर्वरक का प्रयोग कर खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ा सकेंगे। किसानों की सबसे बड़ी समस्या उर्वरक चयन को लेकर होती है। वे दुकानदारों की राय पर खेतों में उर्वरक का छिड़काव करते हैं। कई बार उनके बताए गए उर्वरक गलत साबित हो जाता है। क्योंकि खेत को जिन पोषक तत्व की जरूरत नहीं होती है, किसान उसे भी खेत में डाल देते हैं। ऐसे में मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे पैदावार बढ़ने के बजाय कम हो जाती है।
अंकित ने कहा कि यह डिजिटल यंत्र किसानों के लिए काफी मददगार साबित होगा। मिट्टी परीक्षण के लिए किसानों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। इन्होंने सफलता का श्रेय पिता ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव को दिया है। उनके पिता कसया दीवानी न्यायालय में बार संघ के अध्यक्ष हैं।
40 हजार रुपए में तैयार हुई है मशीन
अंकित ने बताया कि आईआईटी के प्रोफेसर जयंत कुमार सिंह के मार्गदर्शन से कॉलेज के दो छात्रों की मदद से यह यंत्र डेढ़ वर्ष में तैयार किया गया है। इसकी लागत महज 40 से 50 हजार रुपये आई है।
एप के जरिए चलेगा
अंकित ने बताया कि भू-परीक्षक यंत्र मोबाइल एप की मदद से चलेगा। इसमें मिट्टी में फास्फोरस, नाइट्रेट पोटैशियम के साथ ही मैग्नीशियम, कैल्शियम का प्रतिशत मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएगा। इस जानकारी को सुरक्षित रखने के साथ ही ऑनलाइन भी शेयर किया जा सकता है। इसके जरिए मिट्टी की अम्लीय प्रकृति की भी जांच की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि जल्द ही इसे गूगल प्ले स्टोर से आसानी से डाउनलोड किया जा सकेगा।
15-20 मिनट में एक हेक्टेयर खेत की करेगा जांच
इस यंत्र से एक हेक्टेयर खेत की जांच करने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है। 10 ग्राम मिट्टी को 100 ग्राम पानी में घोला जाता है। उसे फिर छन्नी की सहायता से छान कर दूसरे गिलास में रख लिया जाता है। यंत्र के एक सिरे को गिलास के अंदर डाला जाता है। जबकि दूसरे छोर पर मोबाइल अटैच रहता है। करीब 40 सेकंड के अंदर मोबाइल स्क्रीन पर मिट्टी की गुणवत्ता की सारी जानकारी होती है।