पडरौना। जिले में टीबी रोग और इसके संक्रमण से निपटने के लिए जिला क्षय रोग विभाग केंद्र सरकार के नौ इंडिकेटर पर लगातार काम कर रहा है। जिले में अबतक छह गांव टीबी मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। विभाग ने 70 गांवों को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में सात जिलों को सब नेशनल सर्टिफिकेट के लिए चुना गया है, जिसमें कुशीनगर को भी जगह मिली है।
जिले में टीबी मुक्त भारत योजना के अंतर्गत अबतक छह ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। डीटीओ डॉ. एनएच त्रिपाठी ने बताया कि पडरौना, विशुनपुरा, कप्तानगंज और सेवरही ब्लॉक के छह गांवों को टीबी मुक्त का प्रमाण पत्र दिया गया है। इनमें जंगल चौरिया, बहादुरगंज, दल बहादुर छपरा शामिल हैं। भारत सरकार की ओर से जारी नौ इंडिकेटर पर जिले की टीम जांच करती है। इन गांवों के ग्राम प्रधान, सदस्य, आशा संगिनी और सीएचओ की मौजूदगी में जनसंख्या के आधार पर नमूने लेकर जांच की जाती है। जांच के दौरान इन गांवों में टीबी के मामले शून्य पाए जाने पर टीबी मुक्त ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जाता है।
डीटीओ ने बताया कि किसी भी गांव में टीबी का मरीज मिलने पर विभाग टीपीटी (टीबी प्रिवेटिंव टेक्निक) के तौर पर मरीज के आस पास के सभी लोगों को आइसोनेक्स दवा की डोज दी जाती है। जिले में विभाग ने 70 ग्राम सभाओं को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य बनाया है जिसमें से छह ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो गई हैं और डीएम की ओर से इसके लिए ग्राम प्रधानों को प्रमाण पत्र भी दे दिया गया है।
टीबी मुक्त ग्राम पंचायत के चयन के लिए जिले में तैनात विभाग के पर्यवेक्षक ग्राम प्रधानों की मदद से एक हजार की आबादी वाले गांवों में करीब तीस लोगों का टीबी की जांच के लिए निर्देशित किया गया है। अगर सभी इंडिकेटर को गांव पूरा कर लेते हैं तो भारत सरकार की टीम गांव में कर जांच करती है और संतुष्ट होने पर गांव को टीबी मुक्त ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जाता है।
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टीबी मुक्त ग्राम पंचायत के लिए जिले में 70 गांवों का लक्ष्य बनाया गया है। फरवरी माह में जिले के छह गांव टीबी मुक्त घोषित किए गए हैं और अन्य 64 गांवों में जिला क्षय विभाग की टीम काम कर रही है और जल्द ही यह संख्या बढ़ेगी। -डॉ. एसएन त्रिपाठी, डीटीओ