तमकुहीरोड। सेवरही क्षेत्र में बृहस्पतिवार को बांसी और गंडक नदी में बहनों ने पिड़िया विसर्जन कर भाइयों की लंबी उम्र की कामना की। इस दौरान शिवाघाट व पिपराघाट के पास मेले जैसा माहौल रहा।
पीड़िया (रुद्र व्रत) मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष के द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसमें दीपावली के दूसरे दिन महिलाएं व लड़किया गाय के गोबर से पिड़िया लगाती हैं। एक माह तक उसकी पूजा कर मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को छुड़ा कर उपवास रखती हैं। द्वितीया तिथि की भोर में उसे नदी में विसर्जित करती हैं। बृहस्पतिवार को सेवरही, पकड़ीयार पूरबपट्टी, टिकुलिया, राजपुर खाश, बभनौली, रकबा दुलमापट्टी, सिराज नगर, सुमही संतपट्टी आदि गांव की युवतियों ने सेवरही के शिवाघाट, गोलाघाट, पिपराघाट, रुक्मिणीघाट सहित अन्य जलाशयों में विधि विधान से पिड़िया कलश की पूजा अर्चना कर विसर्जित किया।
उजारनाथ प्रतिनिधि के अनुसार बृहस्पतिवार की सुबह क्षेत्र के सिंदुरिया बुजुर्ग, मोगलपुरा, करमैनी, भेलया, चन्द्रौटा, सपही बुजुर्ग, जवार भैंसहा, गगलवा, देवरिया वृत, लोहलनगडी धार मठिया आदि गांवों की लड़कियों ने गोबर्धन पूजन के दिन गोबर से बनाई गई पिड़िया का विर्सजन किया। इसके बाद साथ लाए बतासा, चिउड़ा, लड्डू, खाजा कसार, केला, कोन आदि से बना प्रसाद वितरित किया। इस दौरान क्षेत्र के सभी नदी घाट और पोखरों के पास मेला जैसा माहौल रहा।