पडरौना। जिले में नामी डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर मरीजों को ठगने का सिलसिला कम नहीं हो रहा है। पथरी के गलत ऑपरेशन से एक शख्स की मौत हो गई। लाश लेकर घरवाले अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर ने तीन चेक दिए, जो 70 हजार रुपये के थे। डॉक्टर ने दाह संस्कार के बाद मिलने की बात कही, लेकिन घरवालों से मिलना तो दूर डॉक्टर जान से मरवाने की धमकी दे रहा है। सोमवार को सीएमओ से मिलकर पीड़ित परिवार ने इसकी शिकायत की।
सदर कोतवाली क्षेत्र के बेलवा जंगल निवासी 32 वर्षीय प्रेम कुशवाहा के पेट में दर्द हुआ। उनकी पत्नी रीमा देवी नगर के छावनी स्थित एक अस्पताल में लेकर पहुंची। आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टर ने पेट में पथरी बताकर ऑपरेशन की बात कही। डॉक्टर की बातों पर विश्वास कर रीमा ने ऑपरेशन के लिए हामी भर दी। डॉक्टर ने ऑपरेशन किया। दूसरे दिन प्रेम कुशवाहा की तबीयत बिगड़ गई और पेट फूलने लगा। डॉक्टर प्रेम को अपनी एंबुलेंस से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। वहां से मरीज को लखनऊ केजीएमयू रेफर कराया। वहां पर डॉक्टर ने गलत ऑपरेशन की बात बताई और इलाज शुरू किया। 9 सितंबर को प्रेम कुशवाहा की इलाज के दौरान मौत हो गई। घरवाले लाश लेकर अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने आनन-फानन तीन चेक दिए, जो कुल 70 हजार रुपये के थे। डॉक्टर बोला कि जाओ दाह संस्कार करो। इलाज में जो रुपये खर्च हुए हैं। वह मिल जाएंगे। आरोप है कि 11 दिसंबर को रीमा देवी अपने घरवालों के साथ अस्पताल पहुंचीं तो डॉक्टर और मौजूद कर्मचारियों ने गाली देते हुए दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी दी। रीमा ने बताया कि खेत बेचकर मैंने इलाज में करीब 15 लाख रुपये खर्च किया। इसके बावजूद, उसके पति की जान नहीं बच सकी। अस्पताल में हुए ऑपरेशन और जिला अस्पताल से रेफर किए गए मरीज के साक्ष्य और दिए गए चेक की फोटोकापी लगाकर सीएमओ से शिकायत की है। रीमा ने बताया कि अस्पताल पर लगे नामी डॉक्टरों का नाम देखने के बाद पति का ऑपरेशन कराने का निर्णय लिया, लेकिन एक भी डॉक्टर अस्पताल पर आते नहीं हैं। सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने बताया कि शिकायत मिली है। जांच कराई जा रही है।
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शहर से लेकर बाजार तक नामी डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर ठगा जा रहा मरीजों को
कुशीनगर में नामी डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर मरीजों को इलाज के नाम पर ठगने का खेल सीएमओ कार्यालय की मिलीभगत से चल रहा है। नवागत डीएम ने पदभार संभालने के बाद पहली बैठक में ही बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित अस्पतालों पर शिकंजा कसने की बात कही थी, लेकिन अब तक इसका असर नहीं दिख रहा है। रविंद्रनगर धूस से पडरौना शहर में बिना रजिस्ट्रेशन और नामी डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर बीस से अधिक अस्पताल संचालित हो रहे हैं। फिर भी सीएमओ कार्यालय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शिकायत पहुंचने के बाद जांच होती है और कार्रवाई के नाम पर खानापूरी कर ली जाती है।
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इलाज करने वाले डॉक्टर बोले
16 फरवरी को प्रेम कुशवाहा के गाल ब्लैडर में पथरी का ऑपरेशन हुआ था। हमारी जिम्मेदारी यह है कि ऑपरेशन के बाद मरीज की तबीयत बिगड़ने पर अच्छे सेंटर पर पहुंचा दें। उसे पहुंचा दिया था। करीब सात महीने बाद उसकी मौत हुई है। सुलह करने के लिए मैंने 70 हजार रुपये का चेक दिया था, लेकिन वह मुकदमा लड़ने की बात कह रही है। इसलिए मैं अपना चेक होल्ड करा दिया हूं। सभी आरोप निराधार हैं।