लक्ष्मीगंज। क्षेत्र के खोटही गांव के परसिया टोला मां काली मंदिर परिसर में शतचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन मंगलवार को श्रीराम के जीवन चरित्र की कथा सुनाई गई। कथा वाचक ने श्रीराम के जीवन को अनुकरणीय बताया। कथा व्यास पंडित आनंद तिवारी ने कहा कि गुरुकुल में श्रीराम और लक्ष्मण ने अल्प समय में ही विद्या पूर्ण की थी। राम ने संयमित और मर्यादित जीवन जीने का ज्ञान प्राप्त किया था। उसका परिणाम रहा कि वनवास होने के बाद भी वे विचलित नहीं हुए। इसलिए राम का जीवन लोगों के लिए अनुकरणीय है।
इस दौरान आयोजक रामजी यादव, मोतीचंद दूबे, चंद्रभान प्रसाद, संजय निषाद, मंगरू, अजीत कुमार, श्रीधन, प्रियांशु, रवि, दिनेश मौर्य, जगदीश प्रसाद आदि मौजूद रहे।
कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी अस्पताल थैलेसीमिया के मरीज की जांच करते चिकित्सक।