सेमराधाम में रामकथा सुनाते जगद्गुरु रामभद्राचार्य।
पडरौना। तुर्कपट्टी क्षेत्र के सेमरा धाम स्थित वनसप्ती मंदिर परिसर में चल रहे रामकथा के चौथे दिन तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि भगवान राम ही चंद्रमा हैं। प्रभु श्रीराम राम के विविध रूप हैं। चंद्र रूपी राम के अवतार पर कोई आरोप नहीं लग सकता है। क्योंकि यह प्रभु श्रीराम की मर्यादा है। प्रभु श्री राम ने जीवनपर्यंत मनुष्य के रुप में जन्म लेने की मर्यादा का पालन किया। यही कारण है कि उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहा गया। उन्हें भारतीय संस्कृति का प्रमुख ध्वज वाहक माना जाता है।
श्रीराम के चंद्र अवतार की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि ...अइसन चंदा ना देखनी भुवन में, जेकर शोभा भरल त्रिभुवन में...। उन्होंने कहा कि पति को पतन से बचाने वाली ही सच्चे अर्थों में जीवन संगिनी है। राम से दूर लंका की अशोक वाटिका में रहने के बाद भी माता सीता हमेशा अपने पति, कुल व समाज के कल्याण के बारे में सोचती रहती हैं। उन्होंने आगे कहा कि विद्या अर्जन करने वाला तपस्या और दान करने वाला व्यक्ति ही वास्तव में मानव है। उसी का जीवन धन्य है, जो पृथ्वी पर आकर भगवान की बनाई दुनिया में अपनत्व, संस्कार व मर्यादा का पालन करता है। सच्चे अर्थ में तप, दान व शील वाला आचरण रखने वाला ही मनुष्य कहलाने का हकदार है। इससे पहले मुख्य यजमान विजय राय, शोभा राय, हरेंद्र जायसवाल, मीना जायसवाल ने विधि विधान से व्यास गद्दी के पूजन की।
इस दौरान चंद्र प्रकाश यादव चमन, राणा प्रताप सिंह, अनिल निर्मल, सुरेंद्र कुशवाहा, डॉ. गोपी कुशवाहा, श्यामबिहारी कुशवाहा, हरिकेश यादव, अनिल प्रजापति, जितेंद्र नाथ शुक्ला, प्रणय शुक्ला, पशुपति शुक्ला आदि मौजूद रहे।