बर्बादी देख रो पड़े शेर मोहम्मद, रामकोला थाना क्षेत्र के माघी मठिया में बुधवार को लगी आग
संवाद न्यूज एजेंसी
रामकोला। थाना क्षेत्र के माघी मठिया गांव में बुधवार को तीन बजे तेज पछुआ हवा चल रही थी। उसी दौरान दिव्यांग शेर मोहम्मद के घर के सामने स्थित नबीहसन की झोपड़ी में आग लग गई। आग की लपटें शेर मोहम्मद के घर तक पहुंच गईं और उसके घर को भी चपेट में ले लीं। आग में घिरी शेर मोहम्मद की पत्नी और चारों बेटियां जिंदा जल गईं। यह हृदयविदारक दृश्य देखकर शेर मोहम्मद चीखने-चिल्लाने लगे।
रामकोला थाना क्षेत्र के माघी मठिया गांव में रहने वाले दिव्यांग शेर मोहम्मद के साथ उनके दादा सफीद, दादी मोतीरानी, पत्नी फातिमा, बेटी कुलसुम, रोकई, अमीना, आयशा और दो माह की खतीजा घर में सोई थीं। उस दौरान तेज हवा चल रही थी। धूप ज्यादा थी। घर के सामने नबीहसन की झोपड़ी थी। उसमें सूखी लकड़ियां भी रखी गई थीं। बताया जा रहा है कि वहीं से निकली आग से इनका घर जलने लगा। आग की लपटों ने तेज पछुआ हवा के चलते सड़क की दूसरी तरफ स्थित दिव्यांग शेर मोहम्मद के घर को भी अपनी चपेट में ले लिया।
घर में सो रहे शेर मोहम्मद के परिजन कुछ समझ पाते, तब तक उनके घर के बाहर बनी झोपड़ी में आग लग गई। तब तक गांव में शोर होने लगा। आग इतनी विकराल थी कि कि दूर से ही शरीर जलने लग रहा था। घर में सो रहे सभी लोग उठ गए और चीखने-पुकारने लगे। लेकिन बाहर निकलने का रास्ता बंद हो चुका था। चार बेटियां और मां एक कमरे में अंदर ही छिप गईं। शेर मोहम्मद के दादा-दादी और एक बच्ची कुलसुम दूसरे कमरे में छिप गए। जिस कमरे में मां और बेटियां छिपी थीं उसमें सामान अधिक होने की वजह से आग कमरे में फैल गई। इसमें पांचों की जलने से मौत हो गई। उधर, दूसरे कमरे में छिपे शेर मोहम्मद के दारा-दादी और बेटी कुलसुम भी झुलस गई।
ऑटो चालक शेर मोहम्मद उस समय पडरौना में थे। आग लगने की सूचना पाते ही थोड़ी देर में घर पहुंच गए। आंख के सामने घर और परिवार को जलते देखकर वह चीखने-चिल्लाने लगे। वह रोते-रोते अचेत हो जा रहे थे। गांव के लोगों ने किसी तरह से आग पर काबू पाया। तब तक शेर मोहम्मद पत्नी और चार बेटियां जलकर मर चुकी थीं। बड़ी बेटी कुलसुम तथा दादा सफीद व दादी मोतीरानी गंभीर रूप से झुलसे थे। उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया, जहां तीनों का इलाज चल रहा है।