छितौनी, खड्डा, रामकोला और दुदही में प्लांट लगाने की शुरू हुई तैयारी
शासन ने दी मंजूरी, 44 करोड़ रुपये की लागत आएगी
पडरौना। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत खड्डा, छितौनी, रामकोला और दुदही नगर पंचायत में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की स्वीकृति शासन ने दी है। इसमें करीब 44 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए स्थानीय प्रशासन ने दुदही को छोड़ अन्य सभी स्थानों पर जल निगम (शहरीय) को भूमि भी उपलब्ध करा दी है। जल निगम अब सर्वे करके डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बना रहा है।
नगर पंचायतों में रहने वाले लोगों के घरों से हर दिन हजारों लीटर गंदा पानी निकलता है। लोगों के घर से निकला गंदा पानी नाली से होकर आस-पास के पोखरों अथवा अन्य खाली पड़े स्थानों पर एकत्र होता है। इससे गंदगी के साथ ही बीमारियों के फैलने की आशंका होती है। इस तरह की समस्या के समाधान के लिए जल निगम की तरफ से चार नगर पंचायतों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी की गई है।
जल निगम से जुड़े लोगों का कहना है कि घरों से निकले पानी को एक जगह पर इकट्ठा करके उसका शोधन किया जाएगा। गंदे पानी को स्वच्छ करके उसका भी प्रयोग हो सकेगा। इसलिए जल निगम (शहरी) की तरफ से छितौनी में 6.41, खड्डा में 4.15, रामकोला में 27.89 और दुदही कस्बा में 5.66 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। शासन ने इन सभी प्रस्तावों पर मंजूरी दे ही है।
खड्डा, छितौनी और रामकोला नगर पंचायतों प्लांट को लगाने के लिए भूमि भी उपलब्ध करा दी गई है, जबकि दुदही नगर पंचायत में भूमि की तलाश जारी है।
चार नगर पंचायतों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी है। इसके लिए शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। इसका डीपीआर तैयार किया जा रहा है। दुदही को छोड़ अन्य तीन नगर पंचायतों ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लागने के लिए भूमि भी उपलब्ध करा दी है।
-राम ईश्वर प्रसाद, जेई, जल निगम
जानिए क्या होता है सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रदूषण से पर्यावरण को बचाता है। एसटीपी प्लांट से गंदे और दूषित पानी को फिर से इस्तेमाल करने लायक बनाया जाता है। एसटीपी तकनीकी नदी, नालों और पोखरों के दूषित पानी की अशुद्धियों को सही करता है। यह पानी के उपचार के लिए सबसे अच्छी तकनीकी मानी जाती है।