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तीन साल के भीतर खाली कराएंगे सेप्टिक टैंक, नहीं तो भरेंगे जुर्माना

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तीन साल के भीतर खाली कराएंगे सेप्टिक टैंक, नहीं तो भरेंगे जुर्माना
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पडरौना। अब तीन साल के भीतर सेप्टिक टैंक (शौचालय टंकी) खाली करवाना आवश्यक है। इसके लिए नगर पालिका की ओर से बायलॉज तैयार किया जा रहा है। अनदेखी करने पर पांच से दस हजार का जुर्माना अदा करना होगा।
शहर अधिकतर मकानों में सेप्टिक टैंक बने हुए हैं। शहर के लगभग 50 हजार घरों में सेप्टिक टैंक हैं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी लोग ऐसे टैंकों को खाली नहीं कराते हैं। समय पर खाली नहीं करने पर अक्सर टैंक लीक हो जाता है। इससे गंदा पानी जमीन में दूर तक फैल जाता है। टैंक से मल निकलना शुरू हो जाता है। ऐसे में सरकारी गाइड लाइन के अनुसार सेप्टिक टैंक को तीन साल के भीतर खाली कराना आवश्यक कर दिया गया है। नगर पालिका की ओर से बायलॉज बनाने की प्रक्रिया को शुरू कर दी गई है। बायलॉज बनते ही नगर पालिका की ओर से सेप्टिक टैंकों की जांच के लिए समिति बनाई जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर जुर्माना वसूला जाएगा।
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गलियों में जाने के लिए मिनी टैंकर खरीदे जाएंगे। शहर की छोटी गलियों के सेप्टिक टैंक भी खाली हो सकेंगे। इसके लिए मिनी सेप्टिक टैंकर (सकिंग मशीन) भेजी जाएगी। इसके लिए खरीद फरोख्त की प्रक्रिया को स्वीकृति दे दी गई है। यह टैंकर चार फुट चौड़ी गली में जा सकेंगे। सेप्टिक टैंकों को खाली करने के लिए वर्तमान में नगर पालिका के पास महज दो टैंकर हैं, जिसकी क्षमता आठ हजार तथा पाच हजार लीटर है।
इन टैंकरों की लंबाई और चौड़ाई अधिक होने के कारण यह शहर की छोटे गलियों में नहीं जाते हैं। इसके चलते गलियों में रहने वाले लोग सेप्टिक टैंक खाली नहीं करा पाते हैं। समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर पालिका छोटे टैंकर की खरीद फरोख्त की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संतराम सरोज ने कहा कि सरकारी गाइड लाइन के अनुसार, तीन साल में सेप्टिक टैंक को खाली करना आवश्यक है, नहीं तो जुर्माना लगेगा। इसके लिए समिति भी बनाई जाएगी।
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शौचालय की सफाई के दौरान तीन लोगों की हुई थी मौत
बीते दो जून को शहर में आवास विकास कॉलोनी में एक व्यक्ति के शौचालय की टंकी साफ करने पहुंचे दो मजदूर भाइयों सहित तीन लोग एक-एक कर अंदर गिर गए। उसमें दम घुटने से तीनों की मौत हो गई। यह देख घटनास्थल पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। काफी मशक्कत के बाद शाम तक तीनों के शवों को बाहर निकाला गया था। ाौचालय की टंकी साफ कराने के लिए ट्रैक्टर और टैंकर मंगाए थे। सफाई के लिए पीडब्ल्यूडी के स्वीपर रवि (35) को बुलाया गया था। रवि अपने छोटे भाई स्वीपर छोटेलाल (30) को साथ लेकर आए थे। शाम को लगभग चार बजे रवि के भाई टैंक में सफाई के लिए घुसे, लेकिन कुछ देर तक बाहर नहीं निकले। फिर रवि उन्हें निकालने के लिए टैंक में उतरे। वह भी कुछ देर बाहर नहीं निकले तो उन्हें देखने के लिए चालक संजय मद्धेशिया (40) टैंक में उतरे, फिर कोई हलचल न होने पर गृहस्वामी ने पुलिस को सूचना दी। काफी मशक्कत के बाद तीनों शवों को बाहर निकाला गया था।
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