फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: 22 बच्चों को लेकर जा रही स्कूल बस गड्ढे में उतरी, दस घायल

Wed, 06 Sep 2023 12:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
विज्ञापन
तिलक पट्टी में स्कूल बस गढ्डे में गिरने की सूचना पर जांच करते खण्ड शिक्षाधिकारी देवमुनि वर्मा व
विज्ञापन
दुदही (कुशीनगर)। बच्चों को लेेकर जा रही स्कूल बस मंगलवार को अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे गड्ढे में उतर गई। बस में सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई। राहगीरों की मदद से बच्चों को बस से बाहर निकाला गया। दस बच्चों को चोटें आई हैं। संयोग ठीक था कि पेड़ से टिककर बस रुक गई थी। बस पलट गई होती और बड़ा हादसा हो जाता। मौके पर पहुंचे बीईओ और इंस्पेक्टर ने घटना की जानकारी ली।
विज्ञापन

विशुनपुरा थाना क्षेत्र के तिलकपट्टी में आरके चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल की बस रोज की तरह अहिरौली, नरहवा, बैकुंठपुर कोठी से 22 बच्चों को लेकर मंगलवार को स्कूल जा रही थी। सुबह करीब 8 बजे बस तिलकपट्टी चौराहे के पास पहुंची थी कि बेकाबू होकर सड़क के किनारे गड्ढे में उतर गई और सागौन के पेड़ से जा टिकी। बस में सवार बच्चे चीखने-चिल्लाने लगे। आसपास के लोग पहुंचे और सुरक्षित बच्चों को बाहर निकाला। दस बच्चों को हल्की चोटें आई हैं।
हादसे की खबर मिलते ही अभिभावक भी पहुंच गए। बताया जा रहा है कि स्टीयरिंग फेल होने से बस गड्ढे में चली गई। हादसे में सलमान (6), जोया (6), अदनान (4), अंकित (6), अश्वनी (4), फिजा (6), गुल्फात्मा (5), एवन (5), निरंजन (8) और अनूप (6) घायल हो गए। सभी का इलाज निजी अस्पताल में कराया गया और स्कूल की छुट्टी कर दी गई।
विज्ञापन

इस घटना से नाराज अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर कार्रवाई की मांग की है। दुर्घटना में घायल हुए बच्चे अभी भी सदमे में हैं। विभाग के मुताबिक] स्कूल की मान्यता नहीं है और दुर्घटनाग्रस्त हुई बस की फिटनेस वैधता भी समाप्त हो गई है।
बीईओ देवमुनि वर्मा ने बताया कि अवैध तरीके से स्कूल संचालित हो रहा था। बस का फिटनेस भी नहीं था। स्कूल संचालक को नोटिस दिया गया है। स्कूल की तरफ से मान्यता के लिए आवेदन किया गया है।
00000
बीएसए कार्यालय की मिलीभगत से चलाते हैं बिना मान्यता के स्कूल
पडरौना। विशुनपुरा थाना क्षेत्र के तिलकपट्टी में बिना मान्यता के संचालित आरके चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल तो एक बानगी है। लोगों का कहना है कि जिले में ऐसे कई स्कूल हैं, जो बिना मान्यता के बीएसए कार्यालय और बीईओ की मेहरबानी से संचालित हो रहे हैं। हादसा होने के बाद विभागीय जिम्मेदारों की जब गर्दन फंसती है तो स्कूल संचालक को नोटिस देकर खानापूरी करते हैं। पांच माह पूर्व भी इस स्कूल को तत्कालीन बीईओ ने नोटिस दिया था, लेकिन स्कूल बंद करना तो दूर नोटिस का जवाब तक देना भी संचालक ने उचित नहीं समझा।
विशुनपुरा थाना क्षेत्र के तिलकपट्टी में आरके चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल परिसर में ही महिला डिग्री कॉलेज चलता है। काॅलेज की बस से पब्लिक स्कूल के बच्चों को स्कूल लाया और पहुंचाया जाता है। जर्जर हो चुकी बस बिना फिटनेस के वर्षों से बच्चों को ढो रही थी। न चाहते हुए अभिभावक अपने लाडलों को इस बस से स्कूल भेजते थे। ऐसी बसों पर परिवहन विभाग की भी नजर नहीं पड़ती है।
पांच माह पूर्व तत्कालीन बीईओ वंशीधर श्रीवास्तव ने स्कूल संचालक को नोटिस दिया था, लेकिन नोटिस का न तो जवाब मिला और न ही स्कूल बंद हुआ। आखिर किसकी शह पर बिना मान्यता के स्कूल का संचालन किया जा रहा था। यह तो जांच का विषय है। चर्चा है कि बीएसए कार्यालय में पटल सहायक और बीईओ की मिलीभगत से जिले में 50 से अधिक बिना मान्यता के पब्लिक स्कूलों का संचालन हो रहा है। इसी नेटवर्क का हिस्सा आरके चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल भी है। हादसे के बाद स्कूल संचालक के बचाव में राजनीतिक पैरवी भी पहुंचने लगी है।
बीएसए डाॅ. रामजियावन मौर्या ने बताया कि अभियान चलाकर बिना मान्यता वाले स्कूलों पर कार्रवाई होती है। नोटिस देने के बावजूद कैसे स्कूल का संचालन होता था, इसकी जांच बीईओ से कराई जा रही है।
00000
आरके चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य कमलेश ने बताया कि स्कूल की मान्यता है। कॉलेज भी मेरा है। कॉलेज की बस थी। इस बस से बच्चे लाए जाते थे। दो बच्चों को हल्की चोटें आई हैं। सभी बच्चे ठीक हैं।
00000
अक्सर खराब हो जाती थी जर्जर हो चुकी बस-
दुदही। जिस बस से बच्चों को स्कूल लाया जा रहा था। वह 13 साल पुरानी है और जर्जर हो चुकी है। बच्चों को लाने और घर पहुंचाने के दौरान बस अक्सर रास्ते में खराब हो जाती थी। ऐसे में बच्चों को देर शाम तक स्कूल प्रशासन घर पहुंचाता था। अभिभावक स्कूल प्रशासन से कई बार जर्जर बस को बदलनेे की मांग कर चुके थे, लेकिन कोई सुन नहीं रहा था। इसे लेकर अभिभावक चिंतित रहते थे।
000
- स्कूल बस अक्सर खराब हो जाता थी। इसके चलते भूख-प्यास से बच्चे परेशान होते थे और चार पहिया गाड़ी से देर शाम तक स्कूल के लोग घर पहुंचाते थे या बाइक से जाकर लाना पड़ता था। प्रशासन को भी इस पर ध्यान देना चाहिए। संयोग ठीक था कि बच्चे सुरक्षित बच गए। बस पलटी होती तो बच्चों का क्या होता? -हसन तारा, अभिभावक
000
हमारे चार बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं। बच्चों को घर आने में अक्सर देर हाेती है। वजह पूछने पर बस खराब होने की बात कही जाती थी। स्कूल के प्रबंधक और प्रधानाचार्य से जर्जर बस को बदलने के लिए कई बार कहा गया, लेकिन अभिभावकों की बातों को अनसुना कर दिया गया। -सरिता देवी, अभिभावक
स्कूल फीस हो या बस का किराया, स्कूल एडवांस जमा करा लेता है। सुविधा के नाम पर धोखा दिया जा रहा है। बिना फिटनेस वाले स्कूल बस से बच्चे क्यों ढोए जा रहे थे? इसकी जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इस तरह से नियमविरुद्ध तरीके से संचालित विद्यालयों पर शिकंजा कसना चाहिए। -पारस, अभिभावक
000
मेरी आंखों के सामने अचानक बस गड्ढे में चली गई और पेड़ से टकराने के बाद तेज आवाज हुई। पेड़ की डाली टूटकर बस के दरवाजे पर चली आई, जिससे दरवाजा बंद हो गया। चीखते-चिल्लाते बच्चे दरवाजा खोलनेे का प्रयास करनेे लगे। आसपास के लोगों ने पेड़ की डाली को काटा, तब दरवाजा खुला और बच्चे बाहर निकले। -बिंदू देवी, अभिभावक
00000
परिवहन विभाग के आरआई बोले-
31 जुलाई 2010 को इस स्कूल बस का पंजीकरण हुआ है। इसकी टैक्स वैधता 30 जुलाई 2025 तक है। इस बस का पंजीकरण प्रधानाचार्य राधाकृष्णा इंटर कॉलेज कोकिलपट्टी के नाम से है। 15 मार्च 2020 को ही इसकी फिटनेस वैधता खत्म हो चुकी थी। बार-बार पत्र देने के बाद भी ये बस की फिटनेस की जांच नहीं करा रहे थे। इसे गंभीरता से लेते हुए 17 जून 2022 को कागजात लॉक कर दिया गया था। साथ ही बस सड़क पर नहीं उतारने का पत्र जारी किया गया था। इसके बाद भी बस को संचालित किया जा रहा था। बस मालिक के खिलाफ केस कराया जाएगा। -आरडी प्रसाद वर्मा, आरआई, एआरटीओ कार्यालय
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें