हाटा। श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय के 99वें स्थापना दिवस पर रविवार को देश के ख्याति प्राप्त संस्कृत के विद्वान, साहित्यकार और विद्यावाचस्पति, महामहोपाध्याय आदि उपाधियों से सम्मानित डॉ. रामजी मिश्र को श्रीनाथ सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने संस्कृत को सभी भाषाओं का मूल बताया।
उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्या में वेद, पुराण, ज्योतिष, गणित, विज्ञान, कंप्यूटर सहित अन्य भाषाओं का भी एक साथ अध्ययन कराने की क्षमता है। ऐसे में भारतीय संस्कृति के पारंपरिक ज्ञान भी संस्कृत में ही निहित हैं। संस्कृत प्राचीन भाषा है। इसी से भारतीय संस्कृति की उत्पत्ति हुई है। इसे ध्यान में रखकर नई शिक्षा नीति में संस्कृत भाषा को स्थान दिया गया है।
मुख्य अतिथि विधायक मोहन वर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में संस्कृत भाषा का महत्वपूर्ण स्थान है। हमारे देश की सामाजिक व्यवस्था एवं सांस्कृतिक विरासत संस्कृत में ही निहित है। उन्होंने कहा कि सरकार संस्कृत के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारे नगर का यह विद्यालय संस्कृत के पठन पाठन और विकास में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।
मुख्य वक्ता माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष जगदीश पांडेय ने कहा कि संस्कृत के विकास के लिए इस विद्यालय की ओर से किया जाने वाला योगदान ऐतिहासिक है। उन्होंने शिक्षकों की ओर से संपादित गंगेश्वर गौरवम्, मोहन पांडेय भ्रमर रचित वंदेमातरम्, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव की तरफ से रचित गीत संग्रह कृष्णार्पिता के लोकार्पण पर भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि हाटा की साहित्यिक विरासत की जड़ों को मजबूत करने में यहां के साहित्यकारों का विशेष योगदान है। महाविद्यालय के प्रबंधक अग्निवेश मणि ने स्वागत भाषण के माध्यम से सभी आगंतुकों के प्रति आभार जताया।
इस दौरान जयप्रकाश नारायण द्विवेदी, निरीक्षक संस्कृत पाठशालाएं गोरखपुर आरएन भारती, श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मारकंडेय नाथ त्रिपाठी ने भी संबोधित किया। इस दौरान आर्यावर्त परिषद प्रयागराज की ओर से संस्था के मंत्री गंगेश्वर पांडेय को महामहोपाध्याय सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस दौरान डाॅ. सुधाकर तिवारी, गीतकार चंदेश्वर शर्मा परवाना, शैलेंद्र पांडेय, सच्चिदानंद पांडेय, संतोष कुमार पांडेय, प्राचार्य डाॅ. राजेश कुमार चतुर्वेदी, विश्वास मणि, डाॅ. रामानुज द्विवेदी, सुधीर उपाध्याय, बुद्ध पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अमृतांशु शुक्ल, परमानंद मिश्र, मधुसूदन पांडेय, महाविद्यालय के अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण पांडेय, सच्चिदानंद पांडेय, अक्षय कुमार गिरी, सूरज राम आदित्य आदि उपस्थित थे। संचालन दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर की सहायक प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी मिश्रा ने किया।
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राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत है वंदेमारतरम गीत संग्रह-
रविवार को लोकार्पित गीत संग्रह वंदेमातरम हाटा नगर के रहने वाले शिक्षक एवं साहित्यकार मोहन पांडेय भ्रमर की चौथी रचना है। इस काव्य संग्रह में मोहन पांडेय भ्रमर ने देश भक्तिभावना को अपने गीत के माध्यम से पिरोया है। जहां पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। उसी कड़ी में इस काव्य संग्रह के माध्यम से जनजन को प्रेरित करने का प्रयास किया गया है।