रोडवेज : कमाई लाखों की, सुविधाएं नदारद
नगर की सड़कों पर दौड़ रही खटारा बसों से यात्री परेशान, टूटा है शीशा, सीट भी क्षतिग्रस्त
पडरौना-कसया डिपो से प्रतिदिन 10 हजार यात्री करते हैं सफर
जून में कमाई के मामले में यूपी के दूसरे नंबर पर आया कुशीनगर
पडरौना। शहर की सड़कों पर खटारा बसें दौड़ रही हैं। बिना फिटनेस के चल रही इन बसों से यात्रियों की जान पर हमेशा खतरा मंडरा रहा है। लंबी दूरी का सफर तय करने वाली बसों का शीशा टूटा रहता है। बैठने की सीट भी ठीक नहीं है। वहीं परिवहन निगम की मानें तो सुरक्षा की दृष्टि से अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स आदि होने चाहिए, लेकिन अधिकांश बसों में यह व्यवस्था नहीं है।
पडरौना डिपो से 36 बसें संचालित की जाती हैं। इसमें से निगम की 21 और अनुबंधित 15 बसें संचालित की जाती हैं। प्रतिदिन दस हजार यात्री सफर करते हैं। इससे रोडवेज को रोजाना 3,57,000 रुपये को आय होती है। इसके बावजूद भी निगम बसों की फिटनेस पर ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं आरटीओ भी इस मामले में कार्रवाई करने के बजाय अनदेखी कर रहा है। जब कोई बड़ा हादसा होता है, तभी विभाग सक्रिय होता है। पडरौना डिपो से गोरखपुर, लखनऊ, दिल्ली की बसें संचालित होती हैं। इसमें से कुछ बसों की खिड़की, पीछे का शीशा, टूल बाक्स आदि टूट गए हैं। दरवाजा भी ठीक नहीं है। इस पर निगम ध्यान नहीं देता है। बीते शुक्रवार को गोरखपुर से आ रही बस सुभाष चौक के पास खराब हो गई थी। इससे राहगीरों को काफी परेशानी हुई। गियर बॉक्स में समस्या हो जाने से 20 मिनट तक बस खड़ी रही। संवाद
जून में 68 लाख रुपये की कमाई के साथ यूपी में दूसरे नंबर पर रहा
परिवहन निगम जून में कमाई के मामले में दूसरे नंबर पर रहा। डीजल सहित अन्य खर्च छोड़कर रोडवेज ने 68 लाख रुपये की कमाई की थी।
रोज 13 और महीने में 31 बिंदुओं की होती है जांच
परिवहन निगम की मानें तो प्रतिदिन बसों की 13 बिंदुओं की जांच वर्कशॉप में होती है। इसमें गियर बॉक्स, शीशा, टायर का हवा आदि शामिल है। वहीं महीने में इंजन सहित 31 बिंदुओं की जांच होती है, लेकिन यह केवल खानापूर्ति ही दिखती है, क्योंकि शीशे, टूल बॉक्स आदि टूटी अवस्था में ही पड़े रहते हैं। बरसात में अधिकतर बसों में या तो वाइपर नहीं हैं अथवा ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
परिचर्चा
रोडवेज महीने में यात्रियों से लाखों रुपये कमाता है। इसके बावजूद भी बसों में यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं हैं।
मंजीत कुमार
गोरखपुर जब भी जाना रहता है, बस से यात्रा करते हैं। सीट क्षतिग्रस्त मिलती है। इस पर निगम ध्यान नहीं देता है।
विजय यादव
शुक्रवार से गोरखपुर से पडरौना के लिए बस में बैठ गया। सुभाष चौक के पास आकर बस के गियर बॉक्स में दिक्क्त हो गई। इससे 20 मिनट तक बस सड़क किनारे खड़ी रही।
अंकित केसरी
पडरौना और कसया डिपो से परिवहन निगम प्रतिदिन तीन लाख से अधिक किराया प्राप्त करता है। इसके बावजूद भी अग्निशमन सहित अन्य सामान नहीं रखता है।
मनीष गुप्ता
वर्जन
निगम और अनुबंधित की 36 बसें संचालित की जाती हैं। जून में डीजल सहित सभी खर्च छांटकर 68 लाख की कमाई हुई थी। इससे यूपी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था। बसें चलती हैं तो शीशे टूट जाते हैं। उसे लगवा दिया जाता है। अन्य सुविधाएं नहीं हैं तो फौरमैन से बात की जाएगी। बस की फिटनेस की जांच प्रतिदिन 13 बिंदुओं व महीने में 31 बिंदुओं पर होती है।
बिंदू प्रसाद, एआरएम