- पडरौना के रामलीला मैदान समेत जिले के विभिन्न स्थानों पर हुआ रावण दहन
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। विजयादशमी बुराई का अंत व अच्छाई अनंत का प्रतिक है। इस मौके पर मंगलवार को पडरौना के राजदरबार के पास स्थित रामलीला मैदान समेत जिले के विभिन्न स्थानों पर बुराई का प्रतीक रावण का दहन हुआ। इस मौके पर मेला का आयोजन हुआ, जहां पहुंचे लोगों ने खूब आनंद लिया।
पडरौना राजदरबार के पास राजा उदित नारायण के समय से दरबार के पास स्थित रामलीला मैदान में शारदीय नवरात्र के दशमी को रावण दहन का आयोजन होता है। बीते वर्षो की भांति इस वर्ष भी दशहरा मेला का आयोजन हुआ। इसमें पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह, सदर विधायक मनीष जायसवाल की अगुवाई में रावण दहन किया गया। रावण दहन होते ही मेला स्थल पर करीब आधे घंटे तक आतीश बाजी हुई। पहुंचे नगर समेत आस-पास के लोगों की सुरक्षा के लिए मेला स्थल पर पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मी तैनात रहे। सदर एसडीएम महात्मा सिंह व सीओ उमेश चंद्र भट्ट, कोतवाली राज प्रकाश सिंह समेत अन्य अधिकारी मेला की व्यवस्थाओं की निगरानी करते दिखे।
जौरा बाजार प्रतिनिधि के अनुसार स्थानीय बाजार में दशहरा के मौके पर रामलीला का मंचन किया। इसमें गांव के लोगों आयोजित रामलीला में रामायण के विभिन्न किरदार के रूप में नजर आए। बीते कई वर्षों से आयोजित इस रामलीला में गांव के आलोक पांडेय ने श्रीराम और दारा सिंह ने रावण की भूमिका निभाई। इसमें श्रीराम व रावण के बीच युद्ध का मंचन हुआ, जिसमें श्रीराम के रावण का अंत करते ही पूरा मेला परिसर जयश्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इस दौरान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शम्भू बरनवाल, पूर्व प्रधान सीताराम यादव, अरविंद मिश्रा, डाॅ. बंगाली, निकेश बरनवाल आदि मौजूद रहे।
दुदही प्रतिनिधि के अनुसार कस्बा में आयोजित दशहरा मेला इस बार सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में आयोजित हुआ। मेलास्थल पर सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया था। इस सीसीटीवी कैमरे की निगरानी नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अजीम आलम और विशुनपुरा पुलिस ने की। मेला में कस्बा के विभिन्न अखाड़ों के खिलाड़ियों ने कई करतब दिखाए। इसके अलावा राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, राम-सीता, मां काली आदि की झांकियां निकाली गईं, जिसे देख मेला में आए लोग मंत्रमुग्ध दिखे।
तमकुहीराज प्रतिनिधि के अनुसार तमकुही राजपरिवार की ओर से रावण दहन और पारम्परिक जुलूस का आयोजन हुआ। यह आयोजन राजपरिवार की तरफ से बीते करीब दो सौ वर्ष से की जाती है। राज परिवार के वंशज महेश्वर प्रताप शाही ने जुलूस की आगवनी हाथी, घोड़ा, रथ के साथ कर रहे थे। इसमें राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान की परिवेश में रथ पर झांकी सवार थे। यह जुलूस कस्बा के ओवरब्रिज चौराहा, मुख्य बाजार, तरया रोड़ आदि का भ्रमण करते हुए रामलीला मैदान पहुंचा, जहां राम व रावण के बीच युद्ध का मंचन कर रावण का वध हुआ।
लक्ष्मीगंज प्रतिनिधि के अनुसार मंगलवार को स्थानीय बाजार स्थित संतनगर चौराहा और खोटही बाजार में रावण दहन किया गया। इस दौरान ग्राम प्रधान पति राकेश कुमार, विजय मौर्य, दीपक अग्रवाल, बबलू पांडेय, गुड्डू गुप्ता आदि मौजूद रहे।