- माल बरामदगी के बाद थानों में रखे सामान पर लग रहा क्यूआर कोड, डिब्बे में रखे जा रहे सामान
- केस नंबर, विवेचक का नाम, क्यूआर कोड नंबर या वादी, प्रतिवादी का नाम डालते ही मिल जाएगा ब्यौरा
- वर्ष 2010-11 में कुशीनगर के कई थानों के मालखाने में रखे गए सामान में हो चुकी है गड़बड़ी
नीलांबुज मिश्र
पडरौना। पुलिस की बरामदगी और कार्रवाई के बाद मादक पदार्थों या कोई भी सामान मालखाने में सील कर रख दिया जाता था। लंबे अंतराल के बाद अदालत में सुनवाई के दौरान विवेचकों का तर्क रहता था कि गांजा-चरस चूहे खा गए या शराब पी गए। अदालती कार्रवाई में इसका लाभ बदमाशों को मिल जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि जिले के चार थानों का डिजिटलाइजेशन किया जा चुका है, बाकी थानों पर काम चल रहा है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद बरामद मादक पदार्थों को मालखाने में जमा कर दिया जाता है। लंबे अंतराल के बाद मुकदमे का जब ट्रॉयल होता है तो बरामद सामान में खासकर मादक पदार्थों के वजन में खेल हो जाता है। इस पर पुलिस का जवाब होता है कि शराब चूहे गटक गए और गांजा-चरस खा गए। पुलिस के इस तर्क के सामने मुकदमे की सुनवाई कमजोर पड़ जाती है और बदमाशों को राहत मिल जाती है।
कुशीनगर में भी वर्ष 2010 और 2011 में मालखाने से बरामद अधिकांश मादक पदार्थों का चूहों की वजह से नुकसान हुआ था और मैनुअल इंट्री में भी गड़बड़ी मिली थी। अब पुलिस की कार्रवाई में बरामद होने वाले सामान की कुंडली ई-मालखाना सॉफ्टवेयर एक क्लिक में बता देगा। सदर कोतवाली, सेवरही, हाटा और पटहेरवा थाने का डिजिटलाइजेशन किया गया है। मालखाना में रखे गए बरामद सामानों पर क्यूआर कोड लग रहा है, जिससे कोई गड़बड़ी नहीं होगी। खड्डा, तरया सुजान, नेबुआ नौरंगिया और कप्तानगंज थाने के डिजिटलाइजेशन का कार्य चल रहा है। बहुत जल्द बाकी थानों को भी इस सुविधा से लैस कर दिया जाएगा। संवाद
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मालखाने के हेड मोहर्रिर को नहीं होगी परेशानी
मालखाना से लगातार माल गायब होने की शिकायत को देखते हुए रिकार्ड को डिजिटलाइज किया जा रहा है। क्यूआर कोड स्कैन करते ही सामने केस संबंधी सामान का ब्यौरा आ जाएगा। मालखाने में रखे गए सामानों पर क्यूआर कोड चस्पा किया जा रहा है। मुकदमा संबंधी सामान को प्लास्टिक के डिब्बों में सील किया जा रहा है। आलमारी के किस दराज में सामान रखा गया है। इसकी भी कोड में डिटेल मिलेगी। इसके पूर्व हेड मोहर्रिर को मालखाने का चार्ज लेने या देने में कई दिन लग जाते थे।
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रजिस्टर से मिट जाती थी लेखनी
पहले थानों में मालखाने के ब्यौरे का अलग रजिस्टर बनाया जाता था। अक्सर पुराने रजिस्टर और माल पर लिखी लेखनी मिट जाती थी। इससे पुलिस को अदालत में मुकदमे के ट्राॅयल के समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
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माल का पूरा ब्यौरा होगा कंप्यूटर में फीड
किसी भी केस में पुलिस जो कोई माल बरामद करती है, उसे मालखाने में जमा किया जाता है। अक्सर यह देखने में आता है कि मादक पदार्थों के वजन में कमी हो जाती है, या गायब हो जाते हैं। हथियार बदल जाते हैं, सामान असली से नकली हो जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि बरामद माल अब डिब्बों में सुरक्षित रखने के बाद उसका पूरा ब्यौरा कंप्यूटर में फीड होगा।
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थानों में माल जब्ती के मुकदमों में सामान की पेशी के दौरान कई बार दिक्कतें आती थीं। कभी थाने से नशीले पदार्थ को चूहे खा गए, कभी कोई वस्तु इधर-उधर हो गई। अब क्यूआर कोड लगने के कारण मालखाने से सामान गायब होने जैसी समस्या नहीं रहेगी।
-धवल जायसवाल, एसपी