तुर्कपट्टी। सेवा, पूजा, जप, तप, स्वाध्याय, दान आदि साधनों द्वारा हृदय शुद्ध होता है। शुद्ध अंत: करण से ही जगत का सही सार समझ में आता है।
ये बातें आचार्य इंद्रजीत पांडेय ने कही। वे क्षेत्र के बरवा कला में आयोजित भागवत कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि बिना वैराग्य के परमात्मा के विषय में जिज्ञासा पैदा नहीं हो पाती है। जब जिज्ञासा होती है तो सदगुरु की आवश्यकता होती है। सदगुरु ही जीव को परमात्मा से मिलाने का रास्ता बताता है और यह रास्ता रामचरितमानस की चौपाइयों में निहित है। कथा वाचक ने कहा कि संसार में दो प्रकार के मार्ग हैं। एक प्रेय का और एक श्रेय का। बुद्धिमान व्यक्ति श्रेय अर्थात कल्याणकारी मार्ग को चुनता है। जबकि सामान्य व्यक्ति प्रेय अर्थात मन को प्रिय लगने वाला मार्ग चुनता है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने कल्याणकारी मार्ग को चुना तथा एक अनुकरणीय चरित्र के साथ कल्याणकारी रामराज्य की स्थापना की। इस दौरान दौरान सुरेंद्रनाथ राय, नीरज त्रिपाठी, धीरज मिश्र, मुन्ना राय, सन्नी चौहान आदि मौजूद रहे।