सेमराधाम में कथा सुनाते रामभद्राचार्य
तुर्कपट्टी। तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि राष्ट्र की चिंता करना संत का धर्म है। जिसके चरणों में बैठने से समस्या का अंत हो जाए वही वास्तविक संत है। मुझे भूखों मरना स्वीकार्य है किंतु राम विरोधियों से समझौता नहीं। राम का काम मेरे जीवन का उद्देश्य है।राम विरोधी राष्ट्र विरोधी हैं। रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित होना चाहिए। रामचारित मानस सनातन संस्कृति की धरोहर है। जो प्रभु श्रीराम ही नहीं भारत राष्ट्र की पहचान है।
वे फाजिलनगर क्षेत्र के सेमरा धाम में शनिवार को पांचवे दिन श्रद्धालुओं को रामकथा का रसपान करा रहे थे। जगद्गुरु ने कहा कि त्रेता का यज्ञ धर्म है। जिसे आसुरी प्रवृति के लोग अर्थात् असुर पूर्ण नहीं होने देते थे। राजा दशरथ से ऋषि विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम को त्रेता युग के यज्ञ को पूर्ण कराने के लिए मांगा। यह सब विधि का विधान है कि जिस प्रभु को राजगद्दी मिलनी थी वह 14 वर्षों के बनवास पर चला गया। इसका उद्देश्य ही था त्रेता युग के यज्ञ को पूर्ण कराना। जो हमारे अराध्य भगवान श्रीराम के अलावा कोई अन्य नहीं कर सकता था। उन्होंने सोने का हिरण बने मारीच प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि बनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने बक्सर में मारीच को मारकर जब फेंका तो वह जहां गिरा वह स्थान वर्तमान समय का मारीशस राष्ट्र है। ऐसे महान थे हमारे अराध्य राम। इससे पहले मुख्य यजमान प्रमुख खड्डा शशांक दूबे तथा सुरेंद्र सिंह व संगीता सिंह के द्वारा व्यास गद्दी पूरे विधि विधान से पूजन के बाद कथा शुरु हुई। सांसद देवरिया डॉ.रमापति राम त्रिपाठी व कुशीनगर विजय कुमार दूबे ने व्यास गद्दी की आरती की। उन्होंने कहा कि राम देश की पहचान हैं।उनका शासन व जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित था। सामाजिक जीवन में शुचिता की स्थापना प्रभु श्रीराम का चरित्र है।चंद्र प्रकाश यादव चमन, राणा प्रताप सिंह,जितेंद्र नाथ शुक्ला,प्रणय कुमार शुक्ला, पशुपति शुक्ला , योगेन्द्र सिंह, अनिल निर्मल आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान भाजपा नेता प्रमोद पांडेय, शैलेंद्र तिवारी, विजय मिश्र, निखिल उपाध्याय, सत्यम शुक्ल, महेंद्र दुबे, प्रमोद सिंह, अमिताभ मिश्र, मनोज तिवारी, अनिल प्रजापति, रुद्र प्रताप सिंह, आदि उपस्थित रहे।