तुर्कपट्टी। सेवा, पूजा, जप-तप, स्वाध्याय, दान आदि साधनों से हृदय शुद्ध होता है। शुद्ध अंत:करण से ही जगत का सही सार समझ में आता है। रामचरित मानस जीव को परमात्मा से मिलाने का रास्ता है। इस लिए मानस में बताई गई सभी बातों का जीवन में अनुकरण करना चाहिए।
ये बातें कथा वाचक मंदाकिनी ने कही। वे बृहस्पतिवार को क्षेत्र के दिघवापट्टी में चल रहे रुद्र महायज्ञ में आयोजित कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को रामचरित मानस के महात्म्य बता रहीं थीं। उन्होंने कहा कि बिना वैराग्य के परमात्मा के विषय में जिज्ञासा पैदा नहीं हो पाती है। जब जिज्ञासा होती है, तो सदगुरु की आवश्यकता होती है। सदगुरु ही जीव को परमात्मा से मिलाने का रास्ता बताता हैं। यह रास्ता रामचरितमानस की चौपाइयों में निहित है। कथा का शुभारंभ कोमल शर्मा और महेंद्र दुबे के व्यासपीठ पूजन कर किया।
इस दौरान संतोष पांडेय, रामप्रवेश शर्मा, नंदकिशोर, चंदन गोंडा, दयानंद शर्मा, रामेश्वर सिंह, महेंद्र दुबे, सुमित्रा देवी, विमला देवी, सुभावती देवी, हरिकेश कुशवाहा, नंदलाल बिद्रोही आदि मौजूद रहे।