पकवा इनार। बुद्ध पीजी कॉलेज में एक और दो अक्तूबर को मनोविज्ञान विभाग की तरफ से राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें मनोवैज्ञानिक जुटेंगे और शोध परक विमर्श करेंगे। भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद की तरफ से संगोष्ठी प्रायोजित है। इसका विषय सफल वयोवृद्धता : मुद्दे एवं चुनौतियां है। इसकी तैयारी में मनोविज्ञान विभाग के आचार्य जुटे हुए हैं। सीपीएआई सह आयोजक है।
संगोष्ठी में कई विश्वविद्यालयों से मनोविज्ञान के आचार्य और अध्येता वयोवृद्धता संबंधी विभिन्न पहलुओं पर शोध परक विमर्श करेंगे। भारतीय सामुदायिक मनोविज्ञान परिसंघ का यह द्विवार्षिक अधिवेशन कुशीनगर में पहली बार होने जा रहा है। इसके पूर्व 2022 में ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी, सोनीपत, हरियाणा में यह आयोजन हुआ था।
इसमें कानपुर से प्रो. एन के सक्सेना, सोनीपत से प्रो. एस पी साहनी, यूनिवर्सिटी ऑफ प्रोविडेंस यूएसए प्रो. सचिन जैन, अमृतसर से प्रो. नवदीप सिंह तुंग, मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान से प्रो.यू के सिन्हा, लखनऊ से प्रो. मधुरिमा प्रधान, वाराणसी से प्रो. आनंद कुमार, जयपुर से प्रो. ए बी मदनावत, अल्मोड़ा से प्रो. आराधना शुक्ल, ग्वालियर से प्रो. नरोत्तम शर्मा, लखनऊ से डॉ. कुमुद श्रीवास्तव, आईएमएस वाराणसी से प्रो. मानसी श्रीवास्तव, कानपुर से प्रो. आभा सिंह, वाराणसी से प्रो. मधु अस्थाना, पंजाब विश्वविद्यालय से प्रो. जितेंद्र मोहन, गाजीपुर से प्रो. अमरनाथ राय, जौनपुर से प्रो. अजय प्रताप सिंह व प्रो. अविनाश पथार्दिकर, जौनपुर सहित अनेक वयोवृद्धता के विविध सामाजिक, सांस्कृतिक, जैविक, चिकित्सकीय, सामुदायिक और साहित्यिक परिप्रेक्ष्यों में विमर्श को नया आयाम देंगे।
इंसर्ट
सात दिवसीय कार्यशाला का भी होगा आयोजन
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी से पूर्व मनोविज्ञान विभाग की ओर से सात दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह समाज विज्ञानी शोधार्थियों के लिए किया जा रहा है। इसमें दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों के आचार्य ऑनलाइन/ऑफलाइन व्याख्यान देंगे। शोधकर्ताओं लिए उपयोगी अनुसंधान तकनीकों को व्याख्यायित करेंगे। शोध संबंधी समस्याओं के लिए अंतर-क्रियात्मक सत्र भी चलेंगे।
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संयुक्त राष्ट्र संघ एक अक्तूबर को मनाता है वयोवृद्ध दिवस
संयुक्त राष्ट्र संघ प्रत्येक वर्ष एक अक्तूबर को वयोवृद्ध जनों के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाता है। इस वर्ष समुदायों में वरिष्ठ जनों की समेकित भूमिका को प्रकाशित करने के रूप में मनाया जाने का थीम है। संयुक्त राष्ट्र संघ की इस विचार के साथ भारतीय वसुधैव कुटुंबकम् की भावना विकसित होगी। इसमें मनोविज्ञान के अवकाश प्राप्त आचार्यों का स्मरण एवं सम्मान दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का विशिष्ट आकर्षण होगा।