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Kushinagar News: बिना फरमाइश पूरी किए समय से नहीं हो पाती वरासत

Fri, 19 May 2023 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना सदर तहसील।संवाद
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फोटो है।
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पिता अथवा माता की मृत्यु के बाद घर और खेतों की वरासत कराने में आती है कठिनाई
माता-पिता के अंतिम संस्कार के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के सामने आती है बड़ी समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। पिता अथवा माता की मृत्यु के बाद घर और खेतों (पैतृक संपत्ति) की वरासत के लिए लोगों को तहसील से लेकर राजस्वकर्मियों का चक्कर लगाना पड़ता है। पिता या माता की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार से गुजरने पर लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को वरासत के लिए लेखपाल से लेकर तहसील तक पहुंचकर आग्रह करना पड़ता है, लेकिन उनमें अधिकतर मामलों में तब तक आवेदक का निवेदन स्वीकार नहीं किया जाता, जब तक चढ़ावा नहीं मिल जाता। किसी किसी मामले में बात पांच हजार से शुरू होती है और दस हजार तक पहुंच जाती है। सदर सहित अन्य तहसीलों में वरासत के लिए आवेदक परेशान हैं। नियमानुसार 21 दिन में ही वरासत हो जानी चाहिए, लेकिन छह माह से अधिक समय गुजर जा रहा है।
पहले नियम था कि अगर किसी की मृत्यु हो जाती थी तो उसकी तेरहवीं के दिन ही संबंधित क्षेत्र का लेखपाल वरासत कर मृतक के वारिसों को खतौनी उपलब्ध कराता था। वर्ष 2004 में राजस्व अभिलेखों की कंप्यूटराइज्ड प्रक्रिया के तहत खतौनी भी कंप्यूटराइज्ड हो गई। इसके बाद भी मृतक के वरासत का दायित्व संबंधित लेखपाल पर था।
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इस बीच कई ऐसे मामले रहे, जहां संबंधित क्षेत्र के राजस्वकर्मियों की लापरवाही से वरासत के सैकड़ों मामले आठ से 10 वर्ष तक लंबित रहे। दो वर्ष पूर्व वरासत के लिए शुरू हुई ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया पारदर्शी तो है, लेकिन जटिल भी हो गई। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी अगर आवेदनकर्ता ने चढ़ावा नहीं दिया तो वरासत प्रक्रिया कागजों में ही उलझी रहेगी और आवेदनकर्ता को तहसील के चक्कर लगाते रहना पड़ेगा।

वरासत दर्ज होने की यह है प्रक्रिया
किसी की मृत्यु होती है तो भूमि, मकान संबंधी राजस्व अभिलेख में उसके वारिस (पत्नी, पुत्र व अविवाहित पुत्री) का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज होता है। इसके लिए वारिस को मृत्यु प्रमाण पत्र एवं परिवार रजिस्टर की नकल संलग्न कर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद यह आवेदन लेखपाल के पास आता है। आवेदक को आवेदन की प्रति एवं साक्ष्य लेखपाल को देना होता है, जिसकी जांचकर रिपोर्ट लेखपाल राजस्व निरीक्षक को भेजता है। राजस्व निरीक्षक इस पर मृतक के स्थान पर उसके वारिस को वरासत करने का आदेश देता है। जिसके बाद संबंधित भूमि राजस्व अभिलेख (खतौनी) में वारिस का नाम दर्ज हो जाता है। अलग-अलग राजस्व ग्रामों में भू-संपत्ति की वरासत के लिए प्रत्येक राजस्व ग्राम का अलग-अलग आवेदन करना होता है।

ऐसे होता है खेल
वरासत के ऑनलाइन आवेदन के निस्तारण के लिए 21 दिन का समय होता है, लेकिन कई ऐसे मामले हैं जो छह माह या इससे अधिक समय से लंबित हैं। इनमें मृतक की मृत्यु तिथि के लिए मृतक प्रमाण पत्र और वारिस तय करने के लिए परिवार रजिस्टर की नकल की मांग की जाती है। इसके साथ ही आवेदक से आधार कार्ड की छाया प्रति मांगी जाती है। इन अभिलेखों में कमियां दिखाते हुए अथवा अधिकारियों की असहमति बताते हुए आवेदक को कई बार दौड़ाया जाता है, फिर चढ़ावा मिलने पर वरासत कर दिया जाता है। चढ़ावा नहीं मिला तो आवेदक को तहसील का चक्कर लगाना पड़ता है।

कई पुराने मामले हैं लंबित
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने से पूर्व मृतक की भू-संपत्ति वरासत नहीं करा पाने वाले वारिसों को अब भी तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कारण, पहले मृतकों का प्रमाणपत्र नहीं बनता था, अब ऑनलाइन आवेदन में मृत्यु की तिथि दर्ज करनी होती है, जिससे इसकी जरूरत पड़ रही है। ऐसे में मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं होने से कई पुराने मामले हैं, जहां वरासत के लिए लोग आठ से 10 वर्षों से चक्कर लगा रहे हैं।

केस-एक
पिता की मृत्यु के बाद से दौड़ रहे हैं। राजस्वकर्मी आवेदन अपूर्ण बताकर लौटा देते हैं। मिलने जाने पर अक्सर बाहर होने का हवाला देते हैं।
-लल्लन, निवासी विशुनपुरा
केस-दो
पिता सीताराम की मृत्यु के बाद वरासत कराने गए तो बताया गया कि इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करें। आवेदन करने के बाद से ही संबंधित लेखपाल से आग्रह कर रहे हैं, लेकिन आवेदन पर उनकी रिपोर्ट नहीं लग रही है।
भोला, निवासी भैसहां
केस-तीन
पिता की मृत्यु हुए दो साल गुजर गए। वरासत के लिए तहसील में आवेदन किए, लेकिन राजस्व कर्मी जल्दी मिलते नहीं हैं। अगर कभी मिल भी जाएं तो मृत्यु प्रमाण पत्र अथवा कुटुंब रजिस्टर में कोई न कोई कमी बताकर लौटा देते हैं। अब तक वरासत नहीं हो पाई है।
फिरंगी, निवासी नरकहवा
खड्डा तहसील में लंबित हैं 55 आवेदन
खड्डा तहसील में वरासत के 55 आवेदन लंबित हैं। ये आवेदन लेखपाल से लेकर विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। इस वजह से इन लोगों की वरासत नहीं हो पा रही है। विशुनपुरा निवासी भगवंत सहित कई लोग वरासत कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी परेशान हैं। उधर, हाटा तहसील क्षेत्र में बृहस्पतिवार को वरासत के 19 आवेदन पत्र लंबित थे।
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कोट
वरासत के जो मामले विवादित होते हैं, उन्हीं के निस्तारण में समय लगता है। जैसे यदि किसी व्यक्ति ने अपने एक बेटे के नाम संपत्ति वरासत कर दी और दूसरे को हिस्सा नहीं दिया। दूसरे बेटे ने आपत्ति कर दी तो उसका निस्तारण करने में समय लगता है। सामान्य मामलों में आरआई के माध्यम से वरासत करा दिया जाता है। वहीं वरासत के विवादित मामले तहसीदार या नायब तहसीलदार के कोर्ट में चले जाते हैं। उनका निस्तारण कोर्ट से होता है।
-देवी दयाल वर्मा, एडीएम
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