गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने से नरवाजोत बांध पर बना दबाव
- तीन दिनों में जलस्तर बढ़कर सवा लाख क्यूसेक के पार पहुंचा
तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज एक बार फिर बढ़ने से नरवाजोत बांध पर पानी का दबाव बढ़ने लगा है। नदी का डिस्चार्ज पिछले तीन दिनों से लगातार सवा लाख क्यूसेक से ऊपर बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि किलोमीटर 1.700 पर 8 करोड़ 63 लाख 35 हजार की लागत से ठोकर का निर्माण व परक्यूपाइन कार्य पूरा कराया जा चुका। फिर भी नदी 1.400 किलोमीटर से 1.700 किलोमीटर के बीच बांध से सटकर बह रही है। इससे कटान का खतरा बना हुआ है।
सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत एक्सटेंशन से अहिरौलीदान तक लगभग 21 किलोमीटर की लंबाई में बहने वाली गंडक नदी के किनारे बने तटबंधों की स्थिति वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े जाने वाले डिस्चार्ज पर निर्भर करता है। डिस्चार्ज बढ़ने के साथ ही तटबंधों पर कटान का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन डिस्चार्ज घटने की स्थिति में कटान का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। पिछले साल नरवाजोत में किलोमीटर 1.700 पर कई दशक पुराने बने ठोकर के कटान की जद में आ जाने से पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई थी और ठोकर पर झोपड़ी का आशियाना बनाकर रहने वाले दस से अधिक परिवारों को पलायन करना पड़ा था। हालांकि, इस साल बाढ़ खंड विभाग की ओर से उस क्षतिग्रस्त ठोकर का निर्माण 8 करोड़ 63 लाख 35 हजार की लागत से पूरा कराया जा चुका है। इसके बावजूद बांध के किलोमीटर 1.400 से किलोमीटर 1.700 के बीच गंडक नदी का भारी दबाव बना हुआ है।
ग्राम प्रधान रामाजी निषाद, कैलाश सिंह, ध्रुव निषाद, पन्नालाल यादव, पुजारी सिंह, रामायन राय, प्रभुनाथ यादव, राजेंद्र सिंह का कहना है कि यदि गंडक नदी का डिस्चार्ज बढ़ने व घटने के बीच यहां कटान शुरू होती है तो बांध किनारे बसे नरवाजोत, बूटन टोला, मोतीराय टोला, भंगी टोला, दहारी टोला, तवकल टोला, उपाध्याय टोला, शिव टोला, देवनारायन टोला सहित अन्य कई गांवों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसी आशंका के मद्देनजर बाढ़ खंड विभाग से सभी संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कराए जाने की मांग की है।
इस संबंध में बाढ़ खंड तृतीय के सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी का कहना है कि इमरजेंसी वर्क के लिए सभी संवेदनशील जगहों पर पर्याप्त बचाव सामग्री का इंतजाम है। फिलहाल बांध को कहीं से कोई खतरा नहीं है।