कुशीनगर। सीएमओ कार्यालय में तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत से रजिस्ट्रेशन के नाम पर खेल पुराना है। अब अस्पतालों के पंजीकरण के नवीनीकरण में भी गड़बड़ी देखने को मिल रही है। चर्चा है कि वाराणसी से फर्जी चिकित्सक की डिग्री खरीदकर बेचने वाले अलाउद्दीन द्वारा उपलब्ध कराई डिग्री पर कुशीनगर में कई ऐसे डॉक्टर तैयार हुए जिनके पास न तो कोई विधिमान्य डिग्रियां थी, न अनुभव और न ही जानकारी। ऐसे में झोलाछाप मरीजों के लिए काल बन रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग अगर फर्जी डिग्रियों और विभाग के ही अधीनस्थ कर्मचारियों पर चाबुक कसता है तो कई रहस्यों से पर्दा उठेगा और मौत का कारण बने झोलाछाप बेनकाब होंगे। जिले के तमकुहीराज का रहने वाला अलाउद्दीन लोगों से रकम लेकर चिकित्सकों की फर्जी डिग्री उपलब्ध कराता रहा।अलाउद्दीन भले ही पकड़ लिया गया हो लेकिन उसकी ओर से दो से पांच लाख रुपये लेकर बेचे गए डिग्री के ऐसे कई डॉक्टर इलाज भी कर रहे हैं। इसी कारण समय समय पर लापरवाही से मरीजों की मौत हो जाती है। इसके अलावा निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण में भी सीएमओ कार्यालय के कर्मचारी पैसे लेकर हेरफेर कर लेते हैं। निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण की प्रक्रिया में संचालक ऑनलाइन करते हैं तो आवेदन की जांच सीएमओ कार्यालय द्वारा की जाती है, जहां खामियों को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है। मानक पूरा न होने के बाद भी उन्हें सीएमओ कार्यालय से सहयोग मिल जाता है और ऐसे अस्पताल धड़ल्ले से चलते रहते हैं।