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Kushinagar News: नवरात्रि में मंदिरों की सीसीटीवी कैमरे से निगरानी करेगी पुलिस

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- मां मैनपुर कोटेश्वरी देवी का सजने लगा दरबार, पुलिस की मंदिरों पर रहेगी पैनी नजर
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- मां मैनपुर कोटेश्वरी देवी करती हैं भक्तों की मुरादें पूरी, सुरक्षा का होगा खास इंतजाम


कसया। मैनपुर गांव में तीनों ओर से कंदराओं से घिरा मां मैनपुर कोटेश्वरी देवी स्थान पर शारदीय नवरात्रि की तैयारियां शुरू हो गई हैं। वैसे तो इस मंदिर पर बारहों में महीने भक्तों की भीड़ रहती हैं। लेकिन नवरात्रि में भक्त कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक मां भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से यहां पर विशेष सुरक्षा का इंतजाम इस नवरात्रि में किया गया है। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरा भी लगाए गए हैं। दरोगा के अलावा महिला और पुरुष सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई है।
शारदीय नवरात्रि को देखते हुए देवी मंदिरों की सफाई और सजावट शुरू हो गए हैं। मंदिरों की रंगाई के अलावा दुधिया और रंग बिरंगी रोशनी वाली झालरों से सजाया जा रहा है। मैनपुर कोट शक्तिपीठ पर नवरात्रि में श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक होती है। जिले के अलावा आस-पास जिले के लोग भी दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसे देखते हुए पुलिस व प्रशासन सतर्क है। मंदिर पर दो दरोगा के अलावा दस से अधिक महिला और पुरुष सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई है। मंदिर पर आने वाले श्रद्धालुओं पर इनकी नजर रहेगी। पांच से अधिक सीसीटीवी कैमरा भी लगवाया गया है। इसकी मॉनिटरिंग पुलिस करेगी। सुरक्षा में पुलिस के सहयोग के लिए मंदिर कमेटी के युवा भी रहेंगे। जरूरत पर एनसीसी के कैडेट्स को भी बुलाया जाएगा। इसके अलावा इलाके अन्य चर्चित मंदिरों पर भी पुलिस की नजर रहेगी। इंस्पेक्टर दिग्विजय नारायण राय ने बताया कि नवरात्रि में मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक होती है। सुरक्षा की व्यवस्था चाकचौबंद की गई है। सीसीटीवी कैमरे में लगाए गए हैं।
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यह है मंदिर की मान्यता
- मैनपुर कोट शक्तिपीठ के अतीत की कहानी गौरवशाली और आध्यात्मिक है। इसका वर्णन दीपवंश धर्म ग्रंथ में मिलता है। यहां पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान रुक कर देवी की अराधना की थी। ऐतिहासिक कुशीनारा (वर्तमान कुशीनगर) का वर्णन बौद्ध धर्मग्रंथ दीपवंश में भी मिलता है। वर्णन के अनुसार कुशीनगर मल्ल वंश की राजधानी थी। मल्ल वंश ने मैनपुर को अपनी छावनी बनाया था। इसमें भगवान बुद्ध के निर्वाण स्थली के उल्लेख के साथ ही मैनपुर को छावनी के रूप में वर्णित किया गया है। मैनपुर कोट की देवी मल्ल वंश की उद्धारक थी। कोई आपदा हो या युद्ध में जाने का समय, पहले माता का पूजन-अर्चन होता था। इसके बाद ही निदान या युद्ध घोष किया जाता था। माता के कृपा से ही मल्ल वंश और उनके राज्य के लोगों के उद्धार होने का विश्वास था।
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