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Kushinagar News: पीएचसी पर बंद रहा ताला, दिन भर इंतजार कर वापस गए मरीज

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- नेबुआ नौरंगिया के भूमिहारीपट्टी नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल
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- करमैनी के नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भी हालत खराब

संवाद न्यूज एजेंसी
पकड़ियार बाजार/उजारनाथ। नेबुआ नौरंगिया के भूमिहारीपट्टी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मंगलवार को ताला बंद रहा। पीएचसी के गेट पर मरीज दिन भर इंतजार करते रहे। लेकिन कोई जानकारी देने वाला नहीं था। देर शाम को मरीज निराश होकर वापस चले गए।
उधर, तमकुही के करमैनी के पीएचसी में बुनियादी सुविधाएं नहीं है। डॉक्टर भी समय से नहीं आते। इससे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
गांव के लोगों ने बताा कि पीएचसी भूमिहारीपट्टी ज्यादातर समय बंद ही रहती है। मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है। जब सीएचसी पर ताला बंद रहता है तो मजबूरी में निजी चिकित्सक के पास जाना पड़ता है। मंगलवार को इस न्यू पीएचसी के मुख्य गेट पर ताला बंद था। गेट के पास दस लोग बैठकर चिकित्सक का इंतजार कर रहे थे। तीन किलोमीटर दूर पिपरावर सिवान से आई नेपाली देवी ने बताया कि दवा लेने आई थी। सुबह से इंतजार कर रही हूं, लेकिन दोपहर हो गई, ताला नहीं खुला। पांच किलोमीटर दूर विजयपुर से आकर रूपई दवा के चक्कर में गेट पर इंतजार कर रहे थे। लौकरिया के बुनेला कुशवाहा, पचफेड़ा की सुभा देवी व चखनी की तजबुन यह सभी लोग न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुलने का इंतजार करते रहे। जब ताला दोपहर 2 बजे तक नहीं खुला तो मायूस होकर घर लौट गए। कुछ मरीज मजबूरन चौराहे पर निजी चिकित्सक से इलाज कराने चले गए। इस स्वास्थ्य केंद्र पर एक चिकित्सक और फार्मासिस्ट के साथ दस कर्मचारियों की तैनाती है, बावजूद इसके स्वास्थ्य सेवा लचर है।
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नेबुआ नौरंगिया सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भूमिहारीपट्टी पर एक बजे तक ताला बंद होने की जानकारी मिली है। संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्वास्थ्य केंद्र बंद रहना घोर लापरवाही है। जिम्मेदार पर कार्रवाई होगी।
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करमैनी में बुनियादी सुविधाएं नहीं

तमकुही के नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करमैनी में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। वर्ष 2004 में इसकी स्थापना हुई थी। भेलया, चंद्रौटा, करमैनी, उजारनाथ, जवार, भैंसहा, तार विशुनपुर, सपहीं, सपही बुजुर्ग, देवरिया वृत, अमरवा, गगलवा, लोहलनगडी सहित करीब 30 गांव के लोगों के लिए बने इस अस्पताल की चहारदीवारी नहीं है। आवासीय परिसर में झाड़ियां उग आई हैं। शौचालय नहीं है। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। यहां फार्मासिस्ट नहीं हैं। डॉक्टर भी नहीं रहते।
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