मंसाछापर। विशुनपुरा ब्लाॅक सभागार में सोमवार को पेयजल एवं स्वच्छता संबंधी कार्यशाला हुई। रैली निकालकर लोगों को जागरूक किया गया। बीडीओ सुशील कुमार सिंह ने लोगों को शुद्ध पेयजल एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। राज्य प्रशिक्षक राम प्रकाश त्रिवेदी ने बताया कि देश के 19.42 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से, 12.65 करोड़ (65%) परिवारों को नल जल आपूर्ति का प्रावधान किया गया है तथा 2027 तक भारत के प्रत्येक घर को नल से जल मुहैया करवाने का लक्ष्य है।
जिला परियोजना समन्वयक गिरिजा शंकर साहनी ने बताया कि पृथ्वी का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से घिरा है। 3 प्रतिशत पानी पीने योग्य है उसमें भी 79 प्रतिशत ग्लेशियरों और बर्फ की चोटियों में है। सिर्फ 2 प्रतिशत ही भूजल है, जिसका एक प्रतिशत उपयोग हो रहा है।एक अनुमान के अनुसार वर्ष 1951 में मीठे पानी की प्रति व्यक्ति वार्षिक उपलब्धता 5,177 घन मीटर थी, जो वर्ष 2011 में घटकर 1,545 घन मीटर रह गई। अनुमान है कि वर्ष 2019 में यह लगभग 1,368 घन मीटर है। मीठे पानी की उपलब्धता में यदि यह गिरावट जारी रही, तो वर्ष 2050 में मीठे पानी की प्रति व्यक्ति उपलब्धता घटकर 1,140 घन मीटर ही रह जाएगी।
उन्होंने कहा कि आबादी बढ़ रही है और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता जा रहा है। इस कारण, विभिन्न सेक्टरों में जल की मांग बढ़ गई है, जबकि जल के स्रोत सीमित हैं। इस प्रकार, सीमित उपलब्धता और उत्तरोत्तर बढ़ती मांग के कारण पेयजल प्रबंधन की समस्या जटिल होती जा रही है। मांग और आपूर्ति के बीच यह एक गंभीर समस्या है। भू जल का अत्यधिक दोहन, पुनर्भरण की कमी से घटता जल स्तर, कम भंडारण क्षमता जल संकट को और बढ़ा सकता है। इसके लिए हर ग्राम सभा में नुक्कड़ नाटक, स्वच्छता मेला सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक किया गया। इस अवसर पर सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) भगवंत कुशवाहा, शोधार्थी प्रवीण अग्निहोत्री, एडीओ आईएसबी कृष्ण मोहन दास, पंकज उपाध्याय इत्यादि उपस्थित रहे।