कसया। नगर में कूड़ा निस्तारण के लिए न तो तहसील प्रशासन गंभीर है और न ही नगरपालिका कुशीनगर। नगर के विभिन्न वार्डों से निकलने वाले कचरे को हाईवे के किनारे स्थित वन विभाग की पौधशाला के पास गिराया जा रहा है। इससे प्रदूषण और गंदगी फैल रही है। बरसात और तेज धूप के बाद कचरे की दुर्गंध से आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ स्थल होने के बावजूद कसया नगर में कूड़े के निस्तारण का कोई ठोस प्रबंध नहीं किया गया है। कुशीनगर से होकर गुजरने वाले हाईवे के बगल में खाली पड़ी भूमि पर ही पूरे नगर का कूड़ा-कचरा गिराया जा रहा है। इससे लोगों का अपने घरों में रहना मुश्किल हो गया है। लोग खिड़की दरवाजे बंद करके रहने के लिए विवश हैं।
डंपिंग स्थल का निर्धारण न होने से प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े-कचरे को हाईवे के किनारे गिराया जा रहा है। तहसील प्रशासन भी इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं पॉलिथीन के उपयोग पर रोक का भी कोई असर नहीं है। पॉलिथीन के उपयोग को रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से छिटपुट जांच अभियान चलाकर औपचारिकताएं पूरी कर दी जा रही हैं। प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कहीं भी होर्डिंग, बैनर अथवा पोस्टर नहीं लगाया गया है।
इस संबंध में नगरपालिका परिषद कुशीनगर के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार का कहना है कि कचरा निस्तारण के लिए नगर में देवरिया मार्ग पर कूड़ा प्रसंस्करण प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है। उसके पूरा होते ही नगरपालिका परिषद को हैंडओवर हो जाएगा। उसके बाद कूड़े की समस्या का निस्तारण हो जाएगा। फिलहाल, खाली पड़ी गड्ढायुक्त जमीन और कस्बे के बाहरी इलाके में कूड़ा-कचरा गिरवाया जा रहा है। पॉलिथीन के संबंध में बताया कि उसका उपयोग बंद करने के लिए नगरपालिका प्रशासन नगर में अभियान चलाएगा और पॉलिथीन मिलने पर जुर्माना लगाया जाएगा।