- भूकंप आने पर पुराने जर्जर ही नहीं, नए भवनों में रहने वाले लोग भी सहमे
- रात के करीब दो बजे तक मोहल्ले की सड़कों पर सहमे लोगों ने गुजारी रात
- सभी एक-दूसरे से फोन या व्हाट्सएप के जरिए लेते रहे भूकंप का अपडेट
पडरौना। भूकंप के तेज झटके से पुराने व जर्जर भवनों में रहने वाले लोग पूरी रात दहशत में रहे। शुक्रवार की रात लोगों ने सड़कों, चौराहों और फुटपाथ पर गुजारी। दोबारा घरों में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। इसी बीच रात करीब एक बजे दोबारा भूकंप आने की अफवाह ने भी लोगों को दहशत में डाल दिया। लोग मोबाइल पर एक दूसरे से अपडेट लेते रहे। खुले में रात गुजारने के कारण कुछ लोगों की तबीयत खराब हो गई।
शुक्रवार की रात करीब 11:35 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। झटका इतना तेज था कि लोग घरों के बाहर निकल गए। आपदा विशेषज्ञ रवि कुमार राय ने बताया कि करीब दस किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से आए इस भूकंप की तीव्रता 6.4 दर्ज की गई है। लोगों ने भूकंप करीब दस सेकेंड तक महसूस किया। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग बदहवासी में घरों से बाहर निकले। भूकंप का केंद्र नेपाल बताया गया है।
झटका लगते ही गिनी छत की ईंट
साहबगंज मोहल्ला निवासी राकेश केसरी ने बताया कि वह पुराने घर पर रहते हैं। यह करीब 50 वर्ष पहले बना है। भूकंप आया तो परिवार के सभी लोग सो रहे थे। झटका इतना तेज था कि छत से तीन-चार ईंट गिर गए। ईंट गिरने की आवाज सुनकर नींद खुली तो मोहल्ले के लोग सड़कों पर थे। लोग शोर मचा रहे थे कि भूकंप आया है बाहर निकलो। वह भी परिवार के साथ घर से बाहर निकल गए।
मकान में पड़ गई दरार
नगर के मेन बाजार निवासी रोहित मल्ल ने बताया कि पडरौना शहर में तिलक चौक और चीनी मिल के पास घर है। तिलक चौक वाला मकान पूरी तरह जर्जर हो गया है। इस मकान में नीचे कुछ किराएदार रहते हैं, लेकिन उसमें कोई रहता नहीं है। मिल के पास बने घर में परिवार के लोग रहते हैं। शुक्रवार की शाम परिवार के साथ एक कार्य से गोरखपुर आए थे। शनिवार की दोपहर घर पहुंचा तो घर के प्रथम तल पर बने एक कमरे में दरार दिखी। कप्तानगंज के भड़सर खास निवासी भिखारी सिंह ने बताया कि कप्तानगंज कस्बा के आजाद चौक पर करीब 50 वर्ष पुरानी मकान है। इसमें कोई रहता नहीं है। आपसी बंटवारा में इस मकान का निर्माण नहीं हो रहा है। शनिवार को जाकर देखा, तो पहले से पड़ी दरारें और चौड़ी हो गईं थी।
बिस्तर पर लेटा तो हिलने लगा पंखा
जगदीशपुरम कॉलोनी के विशाल शुक्ल, सुनील कुमार मिश्र और अवधेश सिंह ने बताया कि जब भूकंप आया तो उस समय भोजन कर सोने जा रहे थे। जैसे ही बिस्तर पर लेटे, छत पर लगा पंखा हिलने लगा। अचानक पंखा हिलते देख अप्रैल 2015 में आए भूकंप की याद आ गई। परिवार के बच्चों और लोगों को तुरंत घर से बाहर निकलने के लिए चिल्लाया। कॉलोनी के ही विरेंद्र कुमार सिंह ने कॉलोनी के लोगों की बने व्हाट्सएप ग्रुप में 10 सेकेंड का एक वीडियो डाला, जिसमें पंखा हिल रहा था। वह लिखते हैं कि भूकंप का झटका महसूस किया गया। बाड़ी टोला के लक्की सिंह, इंद्रजीत गुप्ता, रानी मद्धेशिया, छुछिया गेट के सुनील मद्धेशिया, रोहित सैनी, तिलक नगर के अशोक मिश्र, मुन्ना सिंह, प्रेमचंद्र सिंह और ओंकार वाटिका कॉलोनी के संजय गुप्ता, डॉ. विनय कुमार पांडेय, तुलसी आवास विकास कॉलोनी के सुरेंद्र कुमार सिंह, मृगेंद्र राघव राव, हिमांशु सिंह ने कहा कि भूकंप आने के बाद किसी का सोफा हिला, किसी ने मेज कुर्सी हिलने की बात कही, तो किसी ने दरवाजे और छत के पंखे हिलने की बात कही।
तिलक चौक के पास वर्ष 1948 में बनी पुरानी मकान है। इसके भूतल पर दुकानें हैं। मकान के प्रथम तल पर परिवार के साथ रहते हैं। जब भूकंप आया तो परिवार के साथ घर निकल गए। करीब एक घंटे तक इंतजार किया लेकिन दोबारा भूकंप नहीं आया तो घर में आए। हालांकि 2015 में आई भूकंप की तीव्रता इससे अधिक थी। उस समय भी कुछ नहीं हुआ था। इस बार भी कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन रात भर मन भयभीत रहा।
- आलोक कुमार बंका, निवासी तिलक चौक
साहबगंज मोहल्ले में पीएनबी मेन ब्रांच के पास करीब 80 वर्ष पुराना मकान है। इसमें सड़क की तरफ से दुकानें हैं। इसके भीतर परिवार के साथ रहते हैं। शुक्रवार की रात जब भूकंप आया तो टीवी देखकर भोजन कर रहा था। तभी लगा बेड के नीचे बिल्ली घुसी है। कुछ देर बाद घर के बाहर सड़क पर भूकंप आने की लोग शोर करने लगे। सुनकर सभी लोग घर से बाहर निकल गए। करीब डेढ़ बजे तक घर से बाहर रहने के बाद घर में आया। पुराना मकान होने के कारण भय बना हुआ है।
- श्याम कुमार खेतान, निवासी साहबगंज
जब भूकंप आया तो परिवार के सभी लोग सो रहे थे। भूकंप के बारे में परिवार के लोगों को बताया तो विश्वास नहीं किए, लेकिन जब घर से बाहर निकले तो आस-पास के सभी लोग घर से बाहर निकले थे। दोबारा भूकंप न आ जाए, इससे मन शंका बनी थी, जिससे रात भर ठीक से सो नहीं पाई।
- उषा देवी, निवासी भारतीय शिवाला मंदिर
बस या बंद गाड़ी में यात्रा के दौरान उल्टी होती है। भूकंप आने के बाद से थोड़े-थोड़े चक्कर आ रहे हैं। इसी लिए नगर अस्पताल डॉक्टर को दिखाने आया हूं।
- महेंद्र पांडेय, निवासी सेमरा
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जब भूकंप आया तो उस समय परिवार के सभी लोग सो रहे थे। उसी दौरान महाराजगंज के एक रिश्तेदार ने फोन पर बताया कि भूकंप आया है। इसके बाद सभी लोग घर से निकल गए। करीब दो घंटे बाद घर में वापस आए। दोबारा भूकंप न आए जाए, इसकी चिंता में पूरी रात सो नहीं सका।
- सुभाष मद्धेशिया, निवासी तमकुहीराज
भूकंप आने के बाद पूरी रात अनहोनी की आशंका से मन सशंकित रहा। परिवार के बड़ों की बात कौन कहे बच्चों को भी पूरी रात नींद नहीं आई है।
- श्रवण प्रसाद, निवासी तमकुहीराज