तमकुहीरोड। नरवाजोत व एपी बांध के तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए गांव वाले फसल की देखभाल व आने-जाने के लिए नावों की मरम्मत कराने में जुट गए हैं। लोगों का कहना कि पानी बढ़ने पर छोटी नाव का ही सहारा रहता है। प्रशासन की ओर से गिनी-चुनी नाव की व्यवस्था की जाती है।
वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में शनिवार रात साढ़े चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद नरवाजोत, पिपराघाट, जंगली पट्टी, घघवा जगदीश, जवही दयाल, परसा उर्फ सिरिसिया, नरवा टोला, बेनिया पिपरा, राजपुर खाश, रानीगंज, बाक खाश, विरवट कोन्हवलिया, बाघा चौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला, अहिरौलीदान, डीह टोला सहित एपी व नरवाजोत बांध के तटवर्ती व निचले क्षेत्र जलमग्न हो गए थे। यहां तक कि फसल भी डूब गई थी। इमिलिया टोला, ततवा टोला, शिव टोला, मोतीराय टोला जाने वाली सड़कों पर भी पानी आ गया था।
हालांकि, डिस्चार्ज कम होने के बाद खेतों से भी पानी उतरने लगा है। बावजूद इसके, बाढ़ का खतरा अभी कम नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों ने अपनी छोटी नावों की मरम्मत करानी शुरू कर दी है। खुद की नाव रखने वाले क्षेत्र के सुरेंद्र सिंह, रामदेव निषाद, बिरेंद्र गोड़, प्रदीप सिंह, सहदेव चौहान, अशोक साहनी, पप्पू यादव, मनोज गुप्ता, बृजकिशोर साहनी आदि का कहना है कि मानसून की समाप्ति तक बाढ़ का खतरा बना रहता है। जब-जब नेपाल की पहाड़ियों पर भारी बारिश होगी, वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाता रहेगा और बाढ़ जैसे हालात बने रहेंगे। उस स्थिति से निपटने के साथ फसल की देखभाल व सुगम आवागमन में उनकी छोटी नावें काफी मददगार साबित हो सकती हैं।