तेज धूप में 37 डिग्री सेल्सियस तक चढ़ा मौसम का पारा, चार दिन तक बारिश का पूर्वानुमान नहीं
उमस भरी गर्मी से राहत देने वाली बिजली भी लोगों को दे रही है दगा, लो वोल्टेज ने बढ़ाई समस्या
भीषण गर्मी के चलते अस्पतालों में मरीज बढ़े, पेट दर्द, बुखार और डायरिया के मरीजों की संख्या अधिक
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। सावन के महीने में जिले में प्रचंड गर्मी का कहर जारी है। तपिश और उमस से लोगों को राहत नहीं मिल रही है। सूरज आग बरसा रहा है। इसकी चपेट में आकर लोग बीमार होकर अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। साथ ही भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। गर्मी और उमस से राहत देने वाली बिजली भी दगा देने लगी है। शहर से गांव तक इतनी बिजली कटौती हो रही है कि लोग रात में सोने के बजाय टहलते नजर आ रहे हैं। लो वोल्टेज होने से दिन में पंखे, कूलर भी काम नहीं कर रहे हैं। गर्मी से परेशान लोग पेड़ों की छांव तलाश रहे हैं।
तेज धूप और उमस से लोग परेशान हो रहे हैं। जैसे-जैसे दिन चढ़ता जाता है, तापमान बढ़ने से उमस भरी गर्मी बढ़ती जा रही है। कड़ी धूप से बचने के लिए अपने चेहरे को लोग ढक रहे हैं। लगातार पड़ रही गर्मी के साथ ही साथ बिजली संकट ने आमजन का जीवन और अधिक प्रभावित कर दिया है। भीषण गर्मी के साथ हो रही बिजली कटौती से जनता त्राहि-त्राहि करने लगी है। बिजली निगम के रजिस्टर के अनुसार शहर में 24 घंटे बिजली निर्बाध रूप से चल रही है, जबकि हकीकत यह है कि लोग बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहे हैं।
शहर के जंगल बेलवा और कटनवार जाने वाली बिजली रात करीब दो बजे फाॅल्ट हो गया। जानकारी होने पर बिजली कर्मियों ने किसी तरह फॉल्ट की तलाश कर भोर में करीब चार बजे उसे ठीक कर बिजली आपूर्ति बहाल किया। उसके बाद बिजली घर में दो नंबर फीडर में लगी सीटी फॉल्ट हो गई। उसे ठीक करने में बिजली कर्मियों को चार घंटे लग गए। सुबह किसी तरह आठ बजे बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी। इसके बाद सुबह करीब नौ बजे खिरिया टोला और महिला थाने के पास लगे ट्रांसफाॅर्मर में गड़बड़ी आ गई। खिरिया टोला में लगे ट्रांसफाॅर्मर में खराबी होने से करीब दो सौ लोगों के घरों की बिजली आपूर्ति बंद हो गई।
महिला थाने के पास ट्रांसफाॅर्मर में फाॅल्ट होेने से महिला थाना और ऑफिसर कॉलोनी की बिजली आपूर्ति गुल हो गई। उसे ठीक करने में बिजली कर्मियों को करीब तीन घंटे लग गए। इस दौरान इन दोनों मोहल्लों की बिजली आपूर्ति ठप रही। यह हाल नगर के अन्य मोहल्लों का भी है। करीब-करीब सभी माेहल्लों में हर दिन दो से तीन घंटे बिजली आपूर्ति बंद रहती है। जब बिजली आती है, तब वोल्टेज इतना कम रहता है कि पंखे हवा नहीं देते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि शहर में होने वाली बिजली कटौती निगम के रजिस्टर में दर्ज नहीं है।
इन दिनों गर्मी एवं उमस ऐसी पड़ रही है कि बिजली कटते ही लोगों की नींद टूट जा रही है। एक बिजली अधिकारी के अनुसार ओवरलोड के कारण बिजली कटने लगी है, जबकि कुछ स्थानों पर लोकल फॉल्ट भी हुआ।
रात में छह बार बिजली कटौती हुई। इसके चलते नींद भी पूरी नहीं हुई। रात के समय तो लोग छत पर सोकर किसी तरह रात गुजार लेते हैं, लेकिन यदि बिजली दिन में कटती है तो लोगों की मुश्किलें बढ़ जा रही हैं। सबसे अधिक परेशानी बच्चों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है।
- इंजीनियर मनोज सिंह
रात में 11 और 3:20 बजे बिजली कटी, जबकि सुबह 5:10 बजे ही बिजली कटौती हुई तो करीब आठ बजे लौटी है। रविवार होने के नाते महिलाएं घर की सफाई समेत अन्य कार्य निपटाने की योजना पहले ही बना लेती हैं, लेकिन रविवार को बिजली नहीं होने से परेशानी बढ़ गई है।
- रामबहाल पटेल
बिजली कटौती के कारण रात में छत पर सोने चले गए, ताकि गर्मी से कुछ राहत मिले। जैसे ही नींद आई परिवार के लोगों ने कहा कि लाइट आ गई है। कमरे में आकर अभी सोने की तैयारी ही कर रहे थे कि पुन: बिजली गुल हो गई। करीब आधे घंटे तक प्रतीक्षा करने के बाद छत पर जाकर सो गए।
- शिवकुमार
रात में तीन बार बिजली कटौती हुई। 15 से 20 मिनट बाद ही बिजली आ गई, लेकिन इससे नींद पूरी नहीं हुई। रविवार की सुबह आठ बजे बिजली गुल हुई तो दोपहर करीब एक बजे लौटी। बिजली कटौती के कारण इन्वर्टर भी पूरी तरह उपयोगी नहीं हो पा रहे हैं।
नितिन श्रीवास्तव, सभासद, महंथ दिग्विजयनाथ नगर
गर्मी बढ़ते ही बिजली की खपत बढ़ गई है। ओवरलोड के कारण बिजली की ट्रिपिंग हो रही है। लोकल फॉल्ट को तत्काल सुधारा जा रहा है। उपकेंद्र को 33 हजार मेन आपूर्ति मिलनी चाहिए, लेकिन 29 हजार वोल्ट की आपूर्ति मिल रही है। इसके चलते लो-वोल्टेज की समस्या बढ़ी है। वोल्टेज कम होने से ही गर्मी में फाॅल्ट की समस्या बढ़ती है। इसके बावजूद उपलब्ध संसाधनों से उपभोक्ताओं की शिकायतें दूर कराई जा रही है।
-इंदराज यादव, एक्सईएन
डेढ़ गुना बढ़ी बिजली की खपत
गर्मी बढ़ने के साथ सभी उपकेंद्रों पर करीब डेढ़ गुना बिजली खपत बढ़ गई है। नाम नहीं प्रकाशित करने पर शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि सामान्य दिनों में 500 एंपियर से 600 एंपियर तक बिजली की खपत होती है। लेकिन गर्मी बढ़ने से बिजली की खपत करीब डेढ़ गुना बढ़कर आठ सौ एंपियर तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक परेशानी 250 केवीए की क्षमता से ऊपर के ट्रांसफाॅर्मर जलने के बाद उसे बदलने में होती है। क्योंकि बीते छह माह पहले ही ट्रांसफाॅर्मर बदलने वाली कार्यदायी संस्था का अनुबंध समाप्त हो गया। इसके बाद अब तक नया टेंडर नहीं हुआ। ट्रांसफाॅर्मर जलने के बाद कर्मचारियों को शीघ्र बिजली आपूर्ति बहाल करने का दबाव रहता है। ऐसे में संसाधन पर्याप्त नहीं होने से परेशानी उठानी पड़ती है।
नेपाल की पहाड़ी से टकराएगी बंगाल से उठी हवा, तब होगी बारिश
पडरौना। कई दिनों से बारिश नहीं हुई तो मौसम के तेवर बदल गए हैं। तेज धूप में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जबकि बंगाल की खाड़ी से नमी भरी पुरवा हवा आ रही है। इस कारण गर्मी और उमस का मौसम बन गया है। शहर में शनिवार की रात बादल छाए, लेकिन बिन बरसे ही बादल उड़ गए। जिले में रविवार को अधिकतम तापमान 37 और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नमी का स्तर 85 प्रतिशत रहा। इस दिन 17 किलोमीटर की गति से हवा चलने के बाद भी दोपहर में धूप इतनी तेज थी कि लोगों को मई याद आने लगी।
आपदा विशेषज्ञ रवि राय ने बताया कि बंगाल की खाड़ी से नमी भरी हवा उठने की वजह से पुरवा हवा चल रही है। जब तक बंगाल की खाड़ी से आने वाली पुरवा हवा नेपाल की पहाड़ियों से नहीं टकराएगी, तब तक बारिश होने की संभावना नहीं है। इसलिए बारिश के लिए लोगों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा।
तेज धूप में महंगी हो गई धान की रोपाई
पडरौना। मानसून की मायूसी के कारण किसानों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा समय में किसान धान की रोपाई का काम कर रहे हैं। बारिश नहीं होने से धान की रोपाई के लिए किसानों को पंपिंग सेट का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके अलावा धान की रोपाई करने वाले मजदूर 140 से 150 रुपये प्रति कट्ठा मजदूरी ले रहे हैं, जबकि बारिश होने के दौरान इनकी मजदूरी 120 रुपये कट्ठा और पिछले वर्ष सौ रुपये कट्ठा धान रोपने की मजदूरी थी। इससे किसानों को धन व समय दोनों नुकसान करना पड़ रहा है। पिछले कई वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष सावन में सबसे कम बारिश हुई। इससे किसान परेशान हैं। ऐसे में धान की फसल में लागत बढ़ने के साथ ही उत्पादन प्रभावित होने की भी आशंका बढ़ती जा रही है।
कुशीनगर जिले में एक लाख 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई होती है। इसके चलते क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किसान धान की खेती से जुड़े हुए हैं। खरीफ की फसल में धान का उत्पादन किसानों के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन बारिश नहीं होने से इस बार धान की फसल किसानों के लिए मुश्किल बन गई है। ये परेशानी जुलाई में मानसून की बेरुखी से आई है। इस महीने अब तक 48.36 एमएम बारिश हुई है, जबकि पिछले वर्ष जुलाई में करीब 60 एमएम बारिश हुई थी। धान की फसल में अगर बारिश न हुई तो रोपाई से लेकर धान की बाली आने तक कम से कम पांच बार पानी चलाना पड़ेगा। एक बार में एक घंटा पानी चलाने में करीब दो सौ रुपये का खर्च आता है। वहीं धान का उत्पादन सात से आठ हजार रुपये प्रति बीघा तक ही होता है। इसमें बीज, जोताई, मजदूरी, उर्वरक सब शामिल हैं। यदि आगे अच्छी बारिश नहीं होती है तो धान के लिए परेशानी हो सकती है। हालांकि, मौसम विभाग के अनुसार आगे बारिश होने की संभावना अभी बनी हुई है।
अस्पतालोंं में बढ़ गए वायरल बुखार के मरीज
पडरौना। उमस भरी गर्मी के कारण बीमार होने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई है। लोग वायरल बुखार, उल्टी दस्त और पेट दर्द के मरीज बढ़ गए हैं, जबकि शुगर, ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल के डॉ. खालिद रब्बानी और डॉ. दिनेश्वर राय ने बताया कि ओपीडी और इमरजेंसी में मरीजोंं की संख्या बढ़ गई है। सामान्य दिनों में करीब 150 मरीज आ रहे थे, जबकि अब 200 से 250 मरीज आ रहे हैं। इसमें करीब 30 से 40 प्रतिशत मरीज वायरल बुखार, उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीज हैं।
उमस भरी गर्मी में बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को धूप में कम निकलना चाहिए। बहुत जरूरी होने पर सूती कपड़ा पहनकर निकलें और खानपान पर विशेष ध्यान दें। तरल पदार्थ जैसे नारियल पानी, ओआरएस का घोल, दाल और दूध, लस्सी का अधिक मात्रा में प्रयोग करें।
- डॉ. सुभाष प्रसाद, बाल रोग विशेषज्ञ, पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय, पडरौना।