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Kushinagar News: नेशनल हाईवे पर सीएचसी, कहीं हड्डी रोग के डॉक्टर नहीं तो कहीं एक्सरे मशीन का टोटा, रेफर हो रहे मरीज

Tue, 01 Aug 2023 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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फोटो है।
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जनपद से होकर गुजरने वाले एनएच-28 और एनएच-28बी पर ज्यादातर होते हैं सड़क हादसे
हड्डी रोग विशेषज्ञ और एक्सरे की सुविधा न होने पर जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिए जाते हैं ज्यादातर मरीज

संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जनपद से होकर गुजरने वाले एनएच-28 के रास्ते लखनऊ से पश्चिम बंगाल तक की लोग यात्रा करते हैं। थोड़ी सी असावधानी के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-28 और 28-बी पर ज्यादातर हादसे होते हैं। इनमें कई बड़े हादसे भी होते हैं। इसे देखते हुए एनएच-28 के किनारे हाटा तहसील क्षेत्र के सुकरौली से लगायत तमकुहीराज क्षेत्र तक करीब 100 किलोमीटर दूरी में पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर अस्पतालों में हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इसके अलावा कुछ जगह एक्सरे की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में दुर्घटना और मारपीट के मामले में घायल मरीजों को इन अस्पतालों में ले जाने पर मरहम-पट्टी कर जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों और उन्हें लेकर आए लोगों की परेशानी तो बढ़ती ही है, एक से दो घंटे का विलंब होने पर मरीज की जान खतरे में भी पड़ जाती है। सोमवार को इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और संसाधनों की उपलब्धता की पड़ताल की गई।

पहले टीबी के मरीज, फिर दूसरे का होता एक्सरे
पडरौना शहर से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-28बी गुजरती है। कभी जनपद मुख्यालय की भूमिका में रहे शहर के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में एक्सरे की सुविधा है, दो एक्सरे टेक्रीशियन भी तैनात हैं, लेकिन यहां एक्सरे और टेक्नीशियन क्षय रोग विभाग की तरफ से तैनात किए गए हैं। इसलिए प्राथमिकता टीबी के रोगियों को दी जाती है। ऐसे में दुर्घटना या मारपीट के आए मरीजों का एक्सरे बाद में हो पाता है। इस अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन का इंतजाम नहीं हो पाया है। इस कारण टीबी और निमोनिया के मरीजों की रिपोर्ट भी ज्यादा स्पष्ट नहीं मिल पाती है। पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी डॉ. संजीव सुमन ने बताया कि यहां एक्सरे का पूरा स्टाफ और संसाधन क्षय रोग विभाग का है। इसलिए टीबी के रोगियों को प्राथमिकता दी जाती है। डिजिटल एक्सरे मशीन की डिमांड की गई है।
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कसया सीएचसी में नहीं हैं हड्डी रोग विशेषज्ञ
कसया नगर स्थित सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने से दुर्घटना में घायल मरीजों को काफी दिक्कतें होती हैं। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर मारपीट एवं हड्डी से संबंधित मरीजों की मरहम-पट्टी कराकर तत्काल जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। इस सीएचसी में साधारण एक्सरे होता है, लेकिन डिजिटल एक्सरे मशीन नहीं लगी है। लोगों को इसके लिए निजी एक्सरे सेंटर पर जाना पड़ता है। इस सीएचसी में किसी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती भी नहीं है, जिससे रिपोर्ट ड्यूटी पर तैनात दूसरे डॉक्टरों को बनानी पड़ती है।

परिचर्चा-
यहां हड्डी रोग के डॉक्टर नहीं हैं। इससे मरीजों को काफी दिक्कतें होती हैं। क्योंकि डॉक्टर मरहम-पट्टी करने के बाद तत्काल जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। डिजिटल एक्सरे के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर जाना पड़ता है।
-रत्नेश श्रीवास्तव, कसया
कसया सीएचसी में डिजिटल एक्सरे नहीं है। सादा एक्सरे होता है। आजकल डॉक्टर डिजिटल एक्सरे ही कराने की सलाह देते हैं। मजबूर होकर लोगों को प्राइवेट में कही महंगे दर पर डिजिटल एक्सरे कराना पड़ता है। क्योंकि जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे रिपोर्ट नहीं मिलती है।
-गोलू यादव, कसया
कसया सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. मारकंडेय चतुर्वेदी ने बताया कि सीएचसी में हड्डी रोग के डॉक्टर तैनात नहीं हैं। एक्सरे सादा होता है। हड्डी से संबंधित इलाज के लिए मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।


तमकुहीराज सीएचसी में कोई हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं

जुलाई में 71 मरीजों को जिला अस्पताल किया गया रेफर

तमकुहीराज सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद जून के अंतिम सप्ताह से खाली है। यहां तैनात रहे हड्डी रोग विशेषज्ञ का मऊ जनपद तबादला हो गया। अभी इस पद पर किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। जुलाई महीने में 71 मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया गया, जिनमें दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीज शामिल रहे। तमकुहीराज के अधीक्षक डॉ. अमित राय ने बताया कि हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात किए जाने की मांग की गई है।

फाजिलनगर सीएचसी से दस दिनों में 32 मरीज हुए रेफर
फाजिलनगर सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात हैं, लेकिन संसाधनों का अभाव है। ऐसे में मरीजों को रेफर करना पड़ता है। यहां हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश कुमार की तैनाती है। डिजिटल एक्सरे मशीन मंगाकर रखी गई है, लेकिन ट्रांसफार्मर न लगने की वजह से उसे चालू नहीं किया जा रहा है। ट्रांसफार्मर के लिए 1.30 लाख रुपये बिजली निगम को भुगतान किया गया है। सीएचसी के अधीक्षक डॉ. अमन नायक का कहना है कि अलग से ट्रांसफार्मर लगाना पड़ेगा, तब डिजिटल एक्सरे मशीन चालू हो पाएगी। साधारण एक्सरे होता है। यहां से दस दिनों में 32 मरीजों को रेफर किया गया है।

डॉक्टर तो हैं पर संसाधन का अभाव

हाटा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एनएच के किनारे स्थित है। यहां आए दिन दुर्घटना में घायल मरीज आते रहते हैं। यहां तैनात हड्डी रोग के डॉ. प्रशांत मल्ल ने बताया कि हड्डी रोग से जुड़े काफी मरीज आते हैं। पुरानी तकनीक वाली एक्सरे मशीन लगी है। इससे एक्सरे कराया जाता है। अगर डिजिटल एक्सरे मशीन लग जाए तो काफी सुविधा हो जाएगी। शेष जो भी संसाधन मौजूद हैं, उनके सहारे बेहतर इलाज करने की कोशिश की जाती है। यहां तैनात एक्सरे टेक्नीशियन आरके सिंह ने बताया कि यह मशीन 60 एमए की है। इससे रीढ़ की हड्डी और सिर का एक्सरे नहीं हो पाता है। ऐसे मरीजों को कहीं और जाना पड़ता है।

देवतहां सीएचसी पर संसाधनों का अभाव
एनएच-28 के किनारे स्थित सुकरौली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है, लेकिन तीन किलोमीटर दूर स्थित देवतहां गांव में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात किए गए हैं। इस अस्पताल पर आने-जाने के लिए निजी वाहन के अलावा दूसरा कोई साधन नहीं है। हड्डी रोगियों के लिए एक्सरे मशीन की सुविधा भी नहीं है। अगर कोई मरीज आता है तो उसे इलाज में काफी दिक्कत होती है। सोमवार को इलाज कराने आए सचिंद्र पटेल, बाबूलाल, कुसुमावती, रोहित, अनामिका आदि ने बताया कि हड्डी वाले चिकित्सक नहीं आए हैं।
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सीएचसी के अधीक्षक डॉ. हेमंत वर्मा ने बताया कि मैं मीटिंग में आया हूं। कुछ संसाधनों का अभाव है। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।


जनपद में हड्डी रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता के अनुसार एनएच-28 के किनारे स्थित सीएचसी पर तैनाती की गई है। तमकुहीराज के हड्डी रोग विशेषज्ञ का कुछ दिनों पहले स्थानांतरण हो गया है। एक्सरे की सुविधा बढ़ाई जा रही है। नौ डिजिटल एक्सरे मशीनें स्वीकृत हो गई हैं। रेडिएशन के संबंध में अनुमति मिलनी बाकी है। इसके मिलते ही मशीनें मंगाकर आवश्यकता के अनुसार वहां भेज दी जाएंगी।
डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ
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