पडरौना। बारिश के मौसम में चर्म रोगियों की संख्या बढ़ गई है। पिछले दो दिनों से मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर रोज 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी चर्म रोग से पीड़ित पहुंच रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के अलावा निजी अस्पतालों में भी ऐसे मरीज इलाज को पहुंच रहे हैं। डॉक्टर दवा देने के साथ ही बचाव की भी जानकारी दे रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी के बीच से गुजरने से बचें। किसी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में जुलाई और अगस्त महीने में चर्म रोगियों की संख्या बढ़ी थी। अगस्त में बारिश थमने के बाद चर्म रोगियों की संख्या में कम हो गई थी। इधर, दो दिनों से हो रही बारिश के बाद एक बार फिर चर्म रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता यादव ने बताया कि रूखी त्वचा, सूखी तवचा, तिल, मुंहासे, मस्से, सफेद दाग, दाद, खुजली, खाज, फोड़ा फुंसी, त्वचा का छिलना, अंगुलियों के बीच घाव बनना आदि चर्म रोग के लक्षण हैं। दो-तीनों से ऐसे मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं। दवा देने के साथ ही उन्हें बचाव की भी जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में बार-बार पानी से गुजरने से बचे। दूषित पानी से गुजरने के बाद साफ पानी से पैरों को धुलें और उनकी साफ-सफाई करें। घाव होने पर मक्खी आदि लगने से बचाव करें और किसी भी तरह की दिक्कत होने पर डॉक्टर की सलाह लेकर ही दवा का इस्तेमाल करें।