पर्यटकों की आवक बढ़ी, कुशीनगर से भी पहुंच रहे लोग
गंडक नदी के किनारे भी पहुंच रहे मोर, लोगों को कर रहे आकर्षित
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। जनपद से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में राष्ट्रीय पक्षी मोरों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। मोर पर्यटकों को लुभा रहे हैं। वहीं इनकी आवाज क्षेत्र के लोगों को सुनाई दे रही है। इतना ही नहीं, गंडक नदी के किनारे तक मोर पहुंंच जा रहे हैं। वीटीआर प्रशासन इनके संवर्धन व अधिवास क्षेत्र को विकसित करने में जुटा है।
पड़ोसी प्रांत बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के 900 वर्ग किलोमीटर में जंगल फैला है। इन दिनों मोर की संख्या तीन हजार तक पहुंच गई है। वीटीआर प्रशासन राष्ट्रीय पक्षी को उनके अनुकूल वातावरण व सुरक्षा के लिहाज से जंगल के कुछ हिस्सों को संरक्षित कर रहा है। पहुंचने वाले पर्यटकोंं को बारिश के मौसम में झुंड में दिखने वाले मोर आकर्षित कर रहे हैं। यूपी-बिहार सीमावर्ती गंडक नदी के दियारा व आसपास क्षेत्रों में भी इनका जाना-जाना बढ़ गया है। सुबह और शाम को पिहू-पिहू की आवाज सुनकर अक्सर खड्डा इलाके के लोग मोर नृत्य देखने के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में वीटीआर में पर्यटकों की आवक बढ़ने से आय भी बढ़ गई है। कुशीनगर जिले से भी लोग इन दिनों खूब पहुंच रहे हैं।
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मोर से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी
-26 जनवरी वर्ष 1963 को मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया। इसका वैज्ञानिक नाम पैवो क्रिस्टेटस है। मोर को संस्कृत में मयूर, अरबी में ताऊस, अंग्रेजी में पिकाक कहा जाता है। मोर की उम्र 25 से 30 वर्ष की होती है। यह ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते हैं। मोर 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है। मुगल बादशाह शाहजहां के तख्त पर मोर की आकृति बनी थी। इसलिए इसे तख्त ए ताऊस कहा गया। मोर मांसाहारी व शाकाहारी दोनों तरह का भोजन करता है। सांप को बड़े चाव से खाने वाले इस पक्षी को नागांतक भी कहा गया है। वर्ष के अगस्त माह में मोर के पंख गिर जाते हैं और ग्रीष्म ऋतु में पुनः निकल जाते हैं। मोर में सूंघने की शक्ति अधिक होती है। भगवान श्री कृष्ण के सिर मोर पंख से सुशोभित होता है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के सीएफ नेसामनी मोर की संख्या बढ़ने को सुखद एहसास मानते हैं। बताते हैं कि हमारा राष्ट्रीय पक्षी मोर प्रकृति का अनुपम उपहार है। वीटीआर क्षेत्र के कुछ हिस्से को मोरों के अधिवास व संवर्धन के लिए विकसित करने की कार्ययोजना बनाकर अमल में लाने का प्रयास चल रहा है।