अभी पूरा बना ही नहीं, गुणवत्ता पर उठने लगा सवाल
शत प्रतिशत नहीं बन पाए सामुदायिक शौचालय, जो बने उन पर भी उठ रहीं उंगलियां
- अभी 990 सामुदायिक शौचालय हुए हैं पूरे, इनमें 972 का हुआ हस्तांतरण
- कई गांवों में सामुदायिक शौचालय दो वर्ष में ही हो गए बेकार
पडरौना। जनपद में अभी सामुदायिक शौचालयों का शत प्रतिशत निर्माण भी नहीं हुआ कि इनकी गुणवत्ता पर सवाल खड़ा होने लगा है। पंचायतीराज विभाग की ही मानें तो प्रत्येक महीने 50 से 60 शिकायतें आ रही हैं। इसके अलावा 1,003 में से अभी 990 सामुदायिक शौचालय ही बन पाए हैं। इनमें से ही 972 का ही हस्तांतरण हो पाया है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत पंचायती राज विभाग को पहले व्यक्तिगत और बाद में सामुदायिक शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। विभाग के अनुसार शौचालय की दो सीट, एक मूत्रालय और एक स्नान घर निर्माण के लिए तीन लाख 85 हजार रुपये, चार सीट, मूत्रालय और स्नान घर निर्माण के लिए पांच लाख 71 हजार रुपये और छह सीट (तीन पुरुष व तीन महिला), मूत्रालय और स्नान घर निर्माण के लिए सात लाख पचास हजार रुपये आवंटित हुए हैं। मजदूरी का भुगतान मनरेगा से करने का आदेश है।
जिले की सभी 1,003 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनने हैं। इनका संचालन ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराने का आदेश दिया गया है। पंचायती राज विभाग अब तक 990 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करा चुका है, जिसमें से 972 हैंडओवर हुए हैं और वहां केयरटेकर भी नियुक्त कर दिए गए हैं, लेकिन इन सामुदायिक शौचालयों की गुणवत्ता पर शुरुआती दौर से ही सवाल उठ रहे हैं। इनकी टाइल्स, टोटियां, पानी की टंकी, विद्युत वायरिंग में गड़बड़ी सहित विभिन्न प्रकार की शिकायतें आ रही हैं। दरवाजे भी टूट गए हैं। पंचायती राज विभाग की ही मानें तो हर माह 50 से 60 शिकायतें आ रही हैं।
वर्जन-
972 सामुदायिक शौचालयों को हैंडओवर करा दिया गया है। वे उपयोग में लाए जा रहे हैं। शेष सामुदायिक शौचालयों में कहीं जमीन का विवाद है तो कहीं मामला कोर्ट में लंबित है। इसलिए उनका निर्माण नहीं हो पा रहा है। टाइल्स या टोटियां टूटने व अन्य प्रकार की खराबी की 50 से 60 शिकायतें प्रत्येक माह आ रही हैं, जिन्हें तत्काल ठीक कराया जा रहा है, जो भी सामुदायिक शौचालय निर्माणाधीन हैं, उन्हें इस माह में पूरा करा लिया जाएगा।
अभय यादव, डीपीआरओ
निर्माण के दो वर्ष बाद ही बदहाल हो गए सामुदायिक शौचालय
पकड़ियार बाजार। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में लगभग तीन करोड़ 22 लाख रुपये खर्च कर बनवाए गए सामुदायिक शौचालय दो वर्ष के भीतर ही जवाब देने लगे हैं। लगभग 30 प्रतिशत शौचालय उपयोग के लायक नहीं रह गए हैं।
क्षेत्र की 76 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण वित्तीय वर्ष 2020-21 में कराया गया था। पांच लाख 71 हजार रुपये की लागत से चार सीट वाले शौचालय के साथ संयुक्त स्नानघर का निर्माण 44 गांवों में कराया गया था। बाक़ी 32 गांवों में तीन लाख 85 हजार रुपये की लागत से दो सीट वाले शौचालय व स्नानघर बनवाए गए हैं, लेकिन अधिकतर अभी से बदहाली में पहुंच गए हैं। किसी शौचालय में दरवाजे टूटकर गिर गए हैं तो कहीं पर सीट और टंकी बेकार हो गई है। सर्वाधिक शौचालयों के फर्श जगह-जगह से उखड़ गए हैं। सबसे दयनीय हालत कुर्मीपट्टी, पचफेड़ा, टेढ़ी, परशुरामपुर के सामुदायिक शौचालयों की है। गांव के लोग इन शौचालयों की मरम्मत कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान प्रधानों का तर्क है कि इनका निर्माण पूर्व प्रधान कराए हैं, जो पांच वर्ष के भीतर ही खराब हो गए हैं तो जवाबदेही निर्माण कराने वालों की बनती है। एडीओ पंचायत मोहन सिंह का कहना है कि सभी सामुदायिक शौचालयों का सर्वे कराया गया है। रिपोर्ट असंतोषजनक है। खराब शौचालयों को ठीक कराया जाएगा।