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साढ़े सात महीने में किसानों को एक धेला भुगतान नहीं

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साढ़े सात महीने में किसानों को एक धेला भुगतान नहीं
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पडरौना। चीनी मिलों ने नए पेराई सत्र की शुरुआत कर दी है, लेकिन कप्तानगंज चीनी मिल ने अभी तक गन्ना किसानों के 43.28 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया है। इस वजह से किसान परेशान हैं।
जनपद में पांच चीनी मिलें संचालित होती हैं। पिछले पेराई सत्र में ढाढ़ा, खड्डा, रामकोला, सेवरही और कप्तानगंज चीनी मिल ने अपने निर्धारित तिथि पर पेराई शुरू की और अपने क्षेत्र का संपूर्ण गन्ना पेरने के बाद बंद हो गईं। ढाढ़ा चीनी मिल ने 68.75 लाख क्विंटल, त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज ग्रुप की रामकोला चीनी मिल ने 67.18 लाख क्विंटल, कप्तानगंज चीनी मिल ने 14.84 लाख क्विंटल, सेवरही चीनी मिल ने 49.65 लाख क्विंटल और खड्डा चीनी मिल ने 17.89 लाख क्विंटल गन्ना पेरा था। इस तरह पांचों चीनी मिलों ने मिलकर पिछले पेराई सत्र में 218.31 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी।
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उसके एवज में इन चीनी मिलों को कुल 75671.81 लाख (सात अरब 56 करोड़ इकहत्तर लाख इक्यासी हजार) रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान करना था। इनमें ढाढ़ा चीनी मिल ने 23676.12 लाख, रामकोला चीनी मिल ने 23361.24 लाख, सेवरही चीनी मिल ने 17198.22 लाख और खड्डा चीनी मिल ने 6257.13 लाख रुपये का संपूर्ण भुगतान कर दिया। कप्तानगंज चीनी मिल 5179.10 लाख रुपये में से सिर्फ 850.68 लाख रुपये का ही भुगतान कर पाई है। शेष 4328.24 लाख रुपये अभी भी भुगतान करना बाकी है। इस चीनी मिल ने 26 जनवरी के बाद से एक रुपया भी किसानों को भुगतान नहीं किया है।
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किसानों को उनके गन्ना मूल्य का भुगतान कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए चीनी मिल के अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।
- दिलीप सैनी, डीसीओ
चीनी बेचकर किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान किया गया है। शेष गन्ना मूल्य का भुगतान करने का प्रयास किया जा रहा है। चीनी का उत्पादन कम होने के कारण भुगतान में दिक्कतें आ रही हैं।
- नरेंद्र वली, कप्तानगंज चीनी मिल के जीएम
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