पडरौना। पशु और शराब तस्करों के जमानतदारों पर पुलिस शिकंजा कसने की तैयारी में जुटी है। दो साल के अंदर दबोचे गए पशु और शराब तस्करों के अधिकतर जमानतदार जिले के ही लोग हैं। ऐसे लोगों की कुंडली पुलिस खंगाल रही है। इससे पुलिस तस्करों का जिले में फैले नेटवर्क को तोड़ने में कामयाब हो सकती है। अब तक तस्करों की जमानत लेने वाले करीब 30 लोगों के नाम सामने आए हैं।
पुलिस की शिकंजा कसने के बावजूद कुशीनगर जिले के रास्ते बिहार में पशु और शराब की तस्करी नहीं रुक रही है। पुलिस मुठभेड़ में 50 से अधिक तस्कर पकड़े जा चुके हैं। बावजूद, तस्करी पर रोक नहीं लग पा रही है। कार्रवाई के बाद जिन आरोपियों को पुलिस जेल भिजवाती है। उनकी जेल से रिहाई कराने वाले में अधिकतर जमानतदार जिले के ही रहने वाले है। पुलिस ने गोपनीय तरीके से करीब 30 जमानतदारों की सूची तैयार कर ली है। पुलिस इनके बारे में पता लगा रही है।
सूत्रों की मानें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रामपुर, मेरठ समेत कई जिले के रहने वाले पशु तस्करों का कुशीनगर जिले में फैले नेटवर्क के पीछे कीसका हाथ और इसके पीछे कौन सा गिरोह काम कर रहा है। गिरफ्तार गए कैरियरों के पास से उनके मोबाइल में कुशीनगर के अलावा,गोरखपुर,गोपालगंज के लोगों का मोबाइल नंबर मिला है। लेकिन पुलिस के पास ऐसा कोई ठोस साबूत नहीं मिल रहा है कि वे तस्करों के सरगना तक पहुंचे। इस लिए पुलिस तस्करों का जमानत कराने वालों की कुंडली खंगालना शुरू किया है। पुलिस अपनी योजना में सफल रही तो गैर जिले के तस्करों के कुशीनगर जिले में फैले नेटवर्क का भंडाफोड़ जल्द हो सकता है।
-तस्करी पर रोक लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। गोरखपुर जोन का पहला जिला कुशीनगर है, जहां मुठभेड़ में तस्करों व बदमाशों को गोली लगी है। बाहरी तस्करों का जो भी नेटवर्क जिले में फैला है, उसे तोड़ने के लिए तस्करों की जमानत लेने वालों के बारे में भी पता लगाया जा रहा है। तस्करों से तार जुड़ने का साक्ष्य मिलने पर इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। -धवल जायसवाल, एसपी कुशीनगर