तीन माह पूर्व कसेरा टोला के छहमंजिलें भवन में लगी थी शॉर्ट सर्किट से आग, परिषदीय विद्यालयों में लगे अधिकांश अग्निशमन यंत्र बदहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। नगर के बाजारों, विद्यालयों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के समुचित इंतजाम नहीं हैं। परिषदीय विद्यालयों में लगे आग बुझाने के यंत्र बदहाल हैं। कहीं स्टोर में बंद पड़े हैं तो कहीं अग्निशमन यंत्रों की वैधता ही खत्म हो चुकी है। इन यंत्रों की बदहाली विभागीय अधिकारियों के कार्यों पर सवाल उठा रही है। वहीं, शहर के कई मुहल्ले संकरी गलियों में बसे हैं, जहां अग्निशमन विभाग की गाड़ी नहीं पहुंच सकती है। ऐसे में यदि शहर के किसी भी मुहल्ले में आग लग जाए तो उसे बुझाना विभाग के लिए चुनौती होगी। यानी आग लगने पर कुआं खोदा जाएगा।
पडरौना नगर का गुदरी बाजार शहर का ऐसा बाजार है, जहां लोगों के दैनिक जरूरतों के सभी सामान मिलते हैं। यहां शहर के अलावा आसपास गांवों और बिहार तक के लोग हर दिन बाजार करने आते हैं। यहां खरीदारों की सुबह से देर शाम तक भीड़ रहती है। यहां की गलियां और मुख्य मार्ग इतना संकरा है कि वहां सामान्य तौर पर एक साथ दो बाइकें नहीं पहुंच सकती हैं। ऐसे में आग लगने की स्थिति में अग्निशमन विभग की गाड़ी पहुंचने में मुश्किल होगी।
इसी तरह नगर का कसेरा टोला, छावनी, साहबगंज, इंदिरानगर, नौका टोला, गांधीनगर, मुन्ना कॉलोनी आदि मुहल्लों की सड़कें भी बेहद संकरी हैं। यदि इन मुहल्लों में किसी भी वजह से आग लग जाए तो उससे निपटने के लिए अग्निशमन विभाग को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
तीन माह पूर्व केसरा टोला स्थित छह मंजिले भवन के पास शाॅर्ट सर्किट से आग लग गई थी। इसको बुझाने में स्थानीय लोगों के अलावा अग्निशमन विभाग को काफी देर तक मशक्कत करनी पड़ी थी। इसी तरह करीब एक वर्ष पहले नगर के कन्नौजिया वार्ड स्थित एक थोक कपड़े की दुकान और साहबगंज मुहल्ला स्थित एक घर में भी शाॅर्ट सर्किट से आग लग गई थी। उसे समय भी आग बुझाने में काफी देर तक परेशान होना पड़ा था।
परिषदीय विद्यालयों में लगे अग्निशमन यंत्र हैं बदहाल
नगर में दो जूनियर और आठ प्राथमिक विद्यालय संचालित होते हैं। इनमें से तीन परिषदीय विद्यालयों में आग बुझाने के इंतजाम की पड़ताल की गई तो सभी उपाय नाकाफी मिले। वहां लगे अधिकांश अग्निशमन यंत्र एक्सपायर मिले, जबकि किसी भी विद्यालय में आग बुझाने की बाल्टी नहीं मिली।
सुबह 11 बजे नगर के कन्नौजिया वार्ड पूर्वी स्थित प्राथमिक विद्यालय में अग्निशमन यंत्र एक्सपायर मिला। विद्यालय के शिक्षामित्र ने बताया कि इसके बारे में प्रधानाध्यापक ही बता पाएंगे। वह छावनी स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी हैं, वहां पढ़ाने गए हैं। हमें कोई जानकारी नहीं है।
इसके बाद सुबह 11:15 बजे साहबगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय कन्या में रखा अग्निशमन यंत्र राशन के बोरे के साथ रही अन्य अनुपयोगी वस्तुओं के बीच कबाड़ में रखा मिला। प्रधानाध्यापक सुनीता जायसवाल ने उसे बाहर निकाला तो उसकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे प्राथमिक विद्यालय छावनी में प्रधानाध्यापक की कक्षा में रखा अग्निशमन यंत्र सही मिला। प्रभारी प्रधानाध्यापक अमित कुमार ने बताया कि करीब दो माह पहले इसको भरवाया गया है।
कागज में होती है रिफिलिंग
बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से संचालित परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है। विद्यालयों में आग लगने पर बचाव के लिए लगाए गए अग्निशमन यंत्र विद्यालयों की आलमारी में बंद पड़े धूल फांकते मिले। इनके लिए होने वाली जांच बस कागजी खानापूर्ति तक ही सिमटकर रह गई। ऐसे में अगर विद्यालयों में आग लग जाए तो मासूमों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। प्रत्येक विद्यालयों में कंपोजिट ग्रांट की धनराशि में 1500 रुपये अग्निशमन यंत्र की रिफिलिंग के लिए मिलता है, लेकिन इनकी रिफिलिंग बस कागज में ही होती है।
एक वर्ष तक प्रभावी रहती है रिफिलिंग
अग्निशमन यंत्रों (सिलिंडरों) को सक्रिय बनाए रखने के लिए इन्हें हर साल रीफिल कराया जाना चाहिए। क्योंकि इन यंत्रों के अंदर भरा केमिकल केवल एक वर्ष तक ही प्रभावी रहता है। इसके बाद इसमें भरा केमिकल पाउडर बन जाता है। जो आग बुझाने में प्रयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे में यदि विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनाने के दौरान आग लग जाए तो उस पर काबू नहीं पाया जा सकता।
कोट
कंपोजिट ग्रांट से हर वर्ष अग्निशमन यंत्र की रिफिलिंग के लिए रुपये दिए जाते हैं। यदि किसी भी अग्निशमन यंत्र की रिफिलिंग नहीं हुई होगी तो उसकी जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करने के अलावा यंत्र की शीघ्र रिफिलिंग कराई जाएगी।
- सुरेंद्र बहादुर सिंह, बीईओ, पडरौना
सड़क के नीचे दब गए हाईड्रेंट
नगर के रेलवे लाइन के दक्षिण बसे मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर नगर पालिका की स्थापना के दौरान ही हाईड्रेंट लगाए गए थे। नगर के बुजुर्ग लोगों की मानें तो नगर के तिलक चौक, मेन बाजार, साहबगंज, धर्मशाला रोड, कोतवाली रोड समेत अन्य कुछ स्थानों पर हाईड्रेंट लगे थे। वे सब सड़क मरम्मत या नए निर्माण के बाद नीचे दब गए हैं।
नगर के लोगों ने कहा
नगर के कई मुहल्ले ऐसे हैं, जहां आग लग जाए तो उसे बुझाना मुश्किल होगा। इतनी संकरी गलियां हैं, जहां दो पहिया वाहन नहीं पहुंच सकते हैं। ऐसे में अग्निशमन की गाड़ी कैसे पहुंच सकेगी।
- अनिल जायसवाल, नगरवासी
नगर पालिका स्थापना के दौरान शहर के मुख्य बाजार और सड़कों पर हाइड्रेंट लगे थे। करीब 20 वर्ष पहले कुछ स्थानों पर दिखाई देते थे लेकिन अब सड़कों की मरम्मत और नए निर्माण में दब गए हैं। अब कहां हाइड्रेंट लगा है, दिखाई ही नहीं देता है।
-अजय गुप्ता, व्यापारी
तीन माह पहले कसेरा टोला स्थित छह मंजिले भवन के पास एक कपड़े की दुकान में शाॅर्ट सर्किट से आग लग गई थी। इसको बुझाने में अग्निशमन विभाग और लोगों को काफी परेशान होना पड़ा था।
- शम्भू साहा, नगरवासी
नगर में आग लगने से बचाव के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए, ताकि आग लगने की स्थिति में तात्कालिक उपाय किए जा सकें। नगर पालिका को इस ओर ध्यान देना चाहिए। आग लगने पर कुआं खोदने जैसी स्थिति नहीं होनी चाहिए।
-विकास साहा, नगरवासी
कोट
पडरौना नगर समेत जिले के सभी कस्बों और गांवों में आग बुझाने के लिए इंतजाम के लिए तैयारी की जा रही है। पानी की उपलब्धता वाले कुछ स्थान चिह्नित भी किए गए हैं। पडरौना में उदित नारायण पीजी कॉलेज के खेल परिसर, नवजीवन ज्योति हाॅस्पिटल और पीडीसीटी मॉल समेत अन्य स्थानों को चिह्नित भी किया गया है। इसके अलावा नगर पालिका से शहर में मौजूद हाइड्रेंट की सूची मांगी गई है, लेकिन उनकी तरफ से अभी मिली नहीं है।
- अशोक कुमार यादव, एफएसओ, कुशीनगर
नगर के लोगों की सुरक्षा का इंतजाम करना नगर पालिका प्रशासन की प्राथमिकता में है। आग लगने समेत अन्य विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयारी की जा रही है। नए सिरे से नगर में हाइड्रेंट लगाने की योजना है। शीघ्र ही कार्य रूप में भी दिखेगा।
- विनय जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष, पडरौना