मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इलाज करते चिकित्सक।संवाद
पडरौना। मेडिकल कॉलेज में न्यूरो के मरीज का इलाज ऑर्थो के डॉक्टर से कराना पड़ रहा है। कारण कि यहां न्यूरो के डॉक्टर नहीं हैं। सप्ताह में एक दिन (बृहस्पतिवार) गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से न्यूरो के डॉक्टर आते हैं। बाकी दिन मरीजों को आर्थो विभाग के डाॅक्टर जरूरी परामर्श देते हैं। जरूरत होने पर गोरखपुर रेफर कर देते हैं। जानकारी के अनुसार, कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में ट्यूमर, स्ट्रोक, उभरी हुई डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस (रीढ़ की हड्डी का संकुचन) और सिर की चोट जैसे मामलों का उपचार मरीज पहुंच रहे हैं। न्यूरो से संबंधित बीमारियों के 40 से अधिक मरीज रोजाना मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ न होने से रेफर करना पड़ता है। सप्ताह में जिस दिन न्यूरो के डॉक्टर आते हैं उस दिन मरीजों की संख्या 100 से अधिक हो जाती है। शुक्रवार को छितौनी की शीला, गोड़रिया के सुमंत सिंह इलाज कराने पहुंचे। न्यूरो के डाॅक्टर नहीं होने के कारण आर्थो के डाॅक्टर ने परामर्श दिया। डॉक्टर ने शीला को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विभाग में रेफर कर दिया।