उजारनाथ। क्षेत्र की ग्राम पंचायत सपही बुजुर्ग गांव स्थित मंदिर के गर्भगृह में नील मणि पत्थर से बनी भगवान विष्णु की प्रतिमा उपेक्षा का शिकार है। कई वर्षों से उतान अवस्था में होने के कारण गांव के लोग उतान बाबा के नाम से पूजन करते हैं। गांव के लोग इस मूर्ति को गुप्तकालीन होने की बात कहते हैं। लोगों का कहना है कि इसके आसपास खुदाई कराई जाए तो कई ऐतिहासिक अवशेष मिलेंगे।
करमैनी-राजापाकड़ रोड स्थित सपही बुजुर्ग गांव में उतान बाबा का मंदिर है। गांव के लोग बताते हैं करीब 60 वर्ष पूर्व यहां मौजूद टीले पर पाकड़ वृक्ष के नीचे मिट्टी में दबी पीठ के बल, यानी उतान अवस्था में काले नील मणि पत्थर की मूर्ति मिली थी। बुजुर्गों ने उसे उतान बाबा का नाम देकर भैरवनाथ मानकर पूजन करने लगे। यह मूर्ति नीले रंग के पत्थर से करीब साढ़े छह फीट लंबी और साढ़े तीन फीट चौड़ी है। इस पत्थर में चार भुजा धारी प्रतिमा के अगल-बगल और ऊपर-नीचे 108 देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी हैं। इसमें भगवान शिव, ब्रम्हा, सूर्य, चंद्रमा, सनत ऋषि, भृगु ऋषि भू-देवी समेत कई अन्य देवी देवताओं की छोटी-छोटी प्रतिमाएं हैं, जिसमें मुख्य, मुकुट, हार, कुंडल, खड्ग और गदा स्पष्ट दिखाई देता है। गांव के श्रीकांत राय, बैजनाथ राय, भूपेंद्र राय, बालेश्वरी राय, केदार राय आदि ने बताया कि प्रतिमा की गहन अध्ययन कने के साथ मंदिर के आस-पास खुदाई की जाय, तो कई ऐतिहासिक अवशेष मिलेगी। इस संबंध में तमकुहीराज के एसडीएम विकास चंद्र ने बताया कि पुरातत्व विभाग की टीम को इसकी जानकारी दी जाएगी। टीम जाकर जांच पडताल कर वास्तविकता को सामने लाएगी।