संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। हिंदू धर्म का प्रथम पर्व नागपंचमी सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन नागों की उत्पत्ति का दिन भी माना जाता है। इस त्योहार पर नाग देवता को दूध लावा चढ़ा कर पूजा की जाती है। इसके अलावा उन्हें दूध लावा चढ़ाने से सर्पदोष से मुक्ति मिलती है।
पौराणिक मान्यता है कि धरती नाग के फन पर टिकी हुई है। नाग पंचमी के दिन से ही हिंदू धर्म में पर्व व त्योहार शुरू हो जाते हैं, जो कार्तिक पूर्णिमा तक जारी रहता है। नागपंचमी के महत्व की चर्चा करते हुए सेवरही दुर्गा मंदिर के पुजारी डॉ. नागेंद्रनाथ द्विवेदी ने बताया कि पुराणों में यह वर्णित है कि भगवान ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण शुरू किया तो सबसे पहले उन्होंने अनंत नाग, वासुकी नाग, तक्षक नाग, कर्कोटक नाग, पद्म नाग, महापद्म नाग, शंखपाल नाग और कुलिक नाग सहित अष्ट नागों की उत्पत्ति की।
इसमें अनंत नाग को सूर्य का प्रतीक, वासुकी नाग को चंद्रमा का प्रतीक, तक्षक नाग को मंगल का प्रतीक, कर्कोटक नाग को बुध का प्रतीक, पद्म नाग को बृहस्पति का प्रतीक, महापद्म नाग को शुक्र का प्रतीक, शंखपाल नाग को शनि और कुलिक नाग को सोम का प्रतीक माना गया है।
कहा जाता है कि ब्रह्माजी ने इन सभी नागों की उत्पत्ति सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को की थी। समुद्र मंथन में भी नागों की विशेष भूमिका रही है। नागपंचमी के दिन गाय का दूध, लावा, धूप, चंदन आदि से नागों की पूजा करना और कटहल के दोने में उन्हें दूध लावा चढ़ाने से सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। नागों की पूजा विशेष समृद्धि का सूचक भी है।