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Kushinagar News: गंडक नदी पर पीपा पुल लगने में देरी से दो जिलों के एक लाख से अधिक लोग परेशान

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सेवरही क्षेत्र में गंडक नदी उस पार से नाव पर धान लेकर आते किसान। संवाद
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- खड्डा क्षेत्र में दो धाराओं में बंट गई है गंडक नदी, पीपा पुल लगाने की दिक्कत
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- तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में पीपा पुल न होने से नाव से आवागमन की विवशता

खड्डा/तमकुहीरोड। खड्डा में गंडक नदी दो धाराओं में बंट गई है। इस कारण पीपा पुल लगाने में देरी हो सकती है। बरसात के बाद हर साल भैसहां घाट पर पीपा पुल लगता है। पीपा पुल लगने में देरी होने के कारण महराजगंज निचलौल व कुशीनगर के खड्डा इलाके के एक लाख से अधिक लोगों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं, तमकुहीराज इलाके के गंडक नदी पर कुछ महत्वपूर्ण स्थानों पर पुल न होने से लोगों को नाव का ही एक मात्र सहारा है।
नदी की दो धारा होने से बढ़ी दिक्कत खड्डा। गंडक नदी की दो धाराएं हो जाने के कारण भैसहां घाट पर लगने वाले पीपा पुल के विलंब होने की आशंका जताई जा रही है। देर होने से लगभग एक लाख लोगों पर इसका सीधा असर होगा। लोगों को मजबूरी में नाव या विहार के रास्ते चक्कर काटकर नदी पार करना पड़ेगा।
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वर्ष 2020 में खड्डा के भैसहां घाट पर पहली बार पीपा पुल लगाया गया जिससे लोगों को काफी सहूलियत हुई थी।हर साल पीपा पुल के लगने में किसी न किसी कारण से विलंब होता रहा है। वर्ष 2022-23 में नदी की एक ही धारा थी और पीपा पुल सही ढंग से चला था, लेकिन बरसात व बाढ़ का मौसम समाप्त हुए 15 दिन से ज्यादा हो गए, अभी पुल लगाने की सुगबुगाहट नहीं दिखाई दे रही है।

नदी के जिस हिस्से पर पीपा का पुल लगता है, वहीं पर दो धाराएं बहने लगी है। ऐसे में पीपा पुल को दूसरे धारा में ले जाकर लगाना कठिन कार्य है। गंडक नदी पार बायीं तरफ बसे खड्डा के मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर तथा महराजगंज जनपद के निचलौल तहसील के सोहगीबरवा, नौका टोला, मटियरवा, शिकारपुर, भोथहा, मूजा टोला आदि गांवों की लगभग 70 हजार आबादी का आवागमन होता है। इसी तरह नदी के दाहिने तरफ बसे भैसहां, मदनपुर, गैनही जंगल, सिसवा गोपाल, सिसई दधीचि, हनुमानगंज, पडरहवा,पकड़ी बृजलाल आदि गांवों की बड़ी आबादी को भी नदी पार करने के लिए पीपा पुल का प्रयोग करते हैं। ग्रामीण मुन्ना यादव, सुरेश यादव, हरिशंकर सिंह, जवाहिर कुशवाहा, दिलीप मोदनवाल, भूपेंद्र तिवारी, नथुनी आदि का कहना है कि जितना जल्दी हो, पीपा पुल लगा दिया जाए। पुल नहीं होने से प्राइवेट नाव से दो धारा को पार करना पड़ रहा है। नहीं तो पनियहवा पुल के रास्ते बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल से होकर काफी दुश्वारी झेलकर खेती-बारी व अन्य कार्य के लिए आना-जाना पड़ रहा है।
इस संबंध में कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता जेसी शर्मा का कहना है कि नदी दो धारा में बह रही है। नदी अभी स्थिर नहीं हो पाई है। दो धारा होने से परेशानी जरूर बढ़ी है, लेकिन पीपा पुल लगने वाले स्थान को चिह्नित किया जा रहा है। जैसे ही उपयुक्त व उपयोगी जगह मिलेगा, पुल लगाकर लोगों को सुविधा प्रदान कर दी जाएगी।

नाव से जाते है खेती करने
तमकुहीरोड। गंडक नदी के उस पार धान की खेती करने वाले किसान इस समय कटाई-मड़ाई में जुटे हुए हैं। नदी पर पुल नहीं होने से उन्हें अपना धान नावों से इस पार लाना पड़ रहा है। यह किसी जोखिम से कम नही है। किसानों का कहना है कि नदी पर पुल नहीं होने से अपनी फसल घर लाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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सेवरही में नरवाजोत से लेकर अहिरौलीदान तक लगभग सत्रह किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। इस नदी के उस पार पिपराघाट, जंगलीपट्टी, घघवा जगदीश, चैनपट्टी, जवही दयाल, विरवट कोंहवलिया, बाकखास, बाघाचौर, गौराहा, भावपुर, नोनियापट्टी, फागूछापर, अहिरौलीदान सहित अन्य कई गांवों के सैकड़ों किसान खेती करते हैं। इस समय भी गंडक नदी पार धान की फसल की कटाई शुरू हो चुकी है, लेकिन लोगों की मजबूरी है कि पिपराघाट से अहिरौलीदान के बीच सत्रह किमी की लंबाई में न तो कोई पक्का पुल है और न कोई पीपा पुल। इस कारण किसानों को गंडक नदी के उस पार खेती-बाड़ी करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नदी के उस पार जाने और आने का एकमात्र साधन नाव है। इस समय धान काटकर किसानों को नाव से इस पार लाने में काफी जोखिम है। नदी पार खेती करने वाले किसान पप्पू यादव, प्रदीप सिंह, बृजकिशोर साहनी, संजय सिंह, सहदेव चौहान, ध्रुव निषाद, प्रभुनाथ यादव, दूधनाथ शर्मा आदि का कहना है कि यूपी क्षेत्र के सैकड़ों लोगो की खेती गंडक नदी के उस पार है, लेकिन आवागमन के लिए आज तक किसी सरकार ने गंडक नदी पर पुल का निर्माण नहीं कराया है। इसके चलते किसानों को जान जोखिम में डालकर खेती-बाड़ी के लिए नाव से जाना आना पड़ता है।
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