मोहर्रम की खबर
पिपरा कनक की जामा मस्जिद में बोले मौलाना मुख्तार अहमद निजामी
संवाद न्यूज एजेंसी
समउर बाजार। इस्लाम के इतिहास में कर्बला की जंग, वह जंग है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। कर्बला की जंग एक तरफ इमाम हुसैन के 72 सिपाही, जिसमें बच्चे, बूढ़े और महिलाएं शामिल थीं, उनकी कुर्बानी की याद दिलाती है तो दूसरी तरफ यजीद के हजारों सैनिकों की फौज का जुल्म की। वह जंग अच्छाई और बुराई की थी। ये बातें मौलाना मुख्तार अहमद निजामी ने कहीं। वह पिपरा कनक की जामा मस्जिद मौजूद लोगों को मोहर्रम के महत्व के बारे में बता रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह महीना इतिहास में एक ऐसे सच्चे किस्से को अपने अंदर समेटे हुए है कि जिसे याद करके आज भी लोग अपनी आंखों के आंसुओं को रोक नहीं पाते हैं। 1400 साल पहले मोहर्रम की 10 तारीख को हजरते इमाम हुसैन ने खुद के साथ अपने 72 साथियों की कुर्बानी देकर इस्लाम के इंसानियत वाले एंगल को दुनिया के सामने लाकर रख दिया था। दुनिया के करोड़ों लोग आज भी गमजदा नजर आते हैं।
इस दौरान मौलाना शम्सुज्जमा मिस्बाही, मौलाना शाहिद रजा, मौलाना अजीमुल्लाह मौलाना हासिम अली शमसुल होदा,उमर उर्फ सद्दाम हुसैन, इरशाद अहमद, जियाउल हक, सैदुल्लाह, हैदर कादरी आदि मौजूद थे।