मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में लेटी महात्मा बुद्ध की प्रतिमा का दर्शन करतीं दीनदयाल उपाध्याय गोर
पकवा इनार। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर की कुलपति प्रोफेसर ने सोमवार को कुशीनगर के प्रमुख बौद्ध दर्शनीय स्थलों का सपरिवार भ्रमण किया। उन्होंने मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर, रामाभार स्तूप व थाई मंदिर की ऐतिहासिकता, प्राचीनता व पुरातात्विक महत्व सहित विशेषताओं की जानकारी ली। भ्रमण के दौरान उन्होंने पर्यटन के बेहतर प्रबंध के लिए एएसआई को धन्यवाद भी दिया।
कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि कुशीनगर के बौद्ध तीर्थ स्थलों से काफी प्रभावित हूं। महात्मा बुद्ध के दर्शन पर लघु पाठ्यक्रम आरंभ करने की योजना है। जल्द ही बोधगया में मगध यूनिवर्सिटी के कुलपति से मिलकर एमओयू साइन करूंगी। उन्होंने बताया कि कुछ सूक्ष्म रोजगारपरक पाठ्यक्रम भी आरंभ किए जाएंगे। वह भी बौद्ध दर्शन से जुड़ा होगा। यह आधुनिकता के साथ वैज्ञानिकता समेटे हुए होगा। इसके अलावा मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में लेटी महात्मा बुद्ध की छठी शताब्दी की प्रतिमा पर चीवर चढ़ाया। विशेष पूजा-अर्चना की। कहा कि परिसर में उत्खनित प्राचीन भग्नावशेषों व भव्य स्तूप की ऐतिहासिकता व प्राचीनता की जानकारी मिली है। उन्होंने विश्व शांति के घंटे के साथ फोटो भी खिंचवाई। यहां से मुकुटबंधन चैत्य यानी रामाभार स्तूप पहुंचीं। परिक्रमा कर उनकी भव्यता व विशिष्टता से अवगत हुईं। इसके बाद थाई मंदिर पहुंची, जहां स्वर्ण आभायुक्त चैत्य में महात्मा बुद्ध के रखे बुलेटप्रूफ कांच की सुरक्षा के बीच पवित्र अस्थि का अवलोकन किया। यहां के प्राकृतिक दृश्य की सराहना की। इस दौरान डाॅ. अभय कुमार राय, डाॅ. सौरभ द्विवेदी के अलावा कुलपति के पति, पुत्री व माता आदि मौजूद रहे।