कसया। एयरपोर्ट प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मानक पूरा करने में जुटा है। एयरपोर्ट पर डिवीओआर सिस्टम इंस्टाल होने के बाद इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) भी लगने वाला है। इसका महत्वपूर्ण पार्ट ग्लाइड पाथ, लोकलाइजर सहित अन्य मशीनें एयरपोर्ट पर पहुंच गई हैं। ये मशीनें रूस से दिल्ली आई थीं, वहां से चेक होने के बाद कुशीनगर एयरपोर्ट पर पहुंच गई हैं। अगस्त तक इसके लग जाने की उम्मीद है। इससे यहां से हर मौसम में विमान उड़ान भर सकेंगे।
आईएलएस से लैस होने पर एयरपोर्ट से घरेलू और अंतरराष्टीय उड़ान में कोई बाधा नहीं आएगी। वर्तमान समय में एयरपोर्ट से विमान सेवा दे रही एयरलाइंस कंपनियां गोरखपुर के एयरपोर्ट से काम चला रही थीं। डाप्लर वेरी हाई फ्रीक्वेंसी ओमिनीडायरेक्शनल रेंज (डिवीओआर) भी इंस्टाल हो गया है। कुशीनगर हवाई अड्डे ने हाल ही में लगभग 3.8 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) उपकरण विशेष रूप से रूस से एनपीओ-आरटीएस-734 मॉडल का अधिग्रहण किया है। इस प्रणाली को 0.7 करोड़ रुपये की लागत वाली कम बिजली वाली डीएमई द्वारा पूरा किया गया है। जिससे आईएलएस बुनियादी ढांचे में कुल निवेश लगभग 4.5 करोड़ रुपये हो गया है। इसका कार्य पूरा होने पर किसी भी मौसम कोहरा, बारिश और रात में भी विमान को टेकऑफ और लैंड होने में कोई दिक्कत नहीं होगी। इसके अभाव में एयरलाइंस यहां से उड़ान भरने में रुचि नहीं ले रही थीं। स्पाइस जेट कंपनी ने उड़ान बंद कर दिया था। फिलहाल यहां से कोई भी घरेलू उड़ान नही हो रही है। इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम विमान को ऑटो मोड में लैंड और टेकऑफ करता है। वहीं, डिवीओआर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (एटीसी) और पायलट को टेकऑफ और लैंडिंग के लिए कम्युनिकेट करता है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से इसको लगने का कार्य अगस्त तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। रूस की कंपनी ने इसे इंस्टाल कराने के जिम्मा लिया है। इन संसाधनों के लगने बाद यह उम्मीद किया जा रहा है, कि यहां से विमान सेवा देने के लिए कंपनियों का रुझान बढ़ेगा। यहां से फ्लाइट मिलने लगेगी। इस संबंध में एयरपोर्ट डायरेक्टर राजेंद्र प्रसाद लंका ने बताया कि एयरपोर्ट पर अतंरराष्ट्रीय मानक पूरा करने का कार्य चल रहा है। आईएलएस के उपकरण एयरपोर्ट पर पहुंच गए हैं। इनको लगाने का सिविल कार्य चल रहा था। उपकरण आने के बाद इसको अगस्त तक लग जाने की उम्मीद है।
0
आईएलएस की उपयोगिता
इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस सिस्टम) एक ग्राउंड-आधारित रेडियो नेविगेशन सिस्टम है, जो पायलट को रनवे की ओर पार्श्व और उर्ध्वाधर मार्गदर्शन देता है। जब रनवे के साथ दृश्य संपर्क स्थापित नहीं किया जा सकता है। उपकरणों के ये टुकड़े हवाई अड्डों के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे हर लैंडिंग की विश्वसनीयता बढ़ाते है। निर्णय की ऊंचाई को कम करते हैं (वह ऊंचाई जिस पर पायलट या तो लैंडिंग प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध होता है या डायवर्ट करता है) और अंततः यह सुनिश्चित करता है कि पायलट रनवे को किसी भी परिस्थिति में समझ सकता है।