11 साल छह माह बाद न्यायालय में हुई हत्या की सुनवाई
डेढ़ लाख रुपये अर्थदंड भी देना होगा आरोपी को
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। कप्तानगंज में जनवरी, 2012 में पत्नी और तीन बच्चों की हत्या की कोशिश तथा उसमें से बेटी की मौत के मामले में बृहस्पतिवार को न्यायालय में सुनवाई हुई। न्यायाधीश ने साक्ष्यों को देखने के बाद हत्यारोपी पिता को घटना का दोषी पाया। लिहाजा, उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा हत्या के मामले में एक लाख और हत्या के प्रयास के मामले में 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता उपेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि वादी परसानंद सिंह ने 03 जनवरी, 2012 को कप्तानगंज थाना में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि अपनी पुत्री श्रीवास्तवा देवी की शादी लगभग 18 वर्ष पूर्व रामज्ञान सिंह पुत्र किशोर सिंह के साथ की थी। वह कप्तानगंज थाना क्षेत्र के डोमबरवा गांव का निवासी है। दोनों से दो बेटियां हुईं, जिनका नाम ज्योति उम्र 14 वर्ष और कृति उम्र 9 वर्ष है। एक लड़का विशाल उम्र 16 वर्ष है।
कहा कि उनकी पुत्री और दामाद रामज्ञान सिंह के बीच कुछ पारिवारिक विवाद हो गया था। उसी आक्रोश में वह 03 जनवरी, 2012 को सुबह उनकी पुत्री, नाती विशाल, नतिनी ज्योति और कृति को कमरे में बंद कर दिया। आरोप था कि उसने अपनी पत्नी श्रीवास्तवा देवी, विशाल, ज्योति और कृति पर किसी धारदार हथियार से प्रहार किया। चीख-पुकार सुनकर लोग दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचे और घायलों को बाहर निकाला। उसके बाद रामज्ञान आंशिक रूप से झुलस गया था।
सभी को कप्तानगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। श्रीवास्तवा देवी, विशाल, ज्योति और कृति को इलाज के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां ज्योति की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया था। तभी से यह मुकदमा विचाराधीन था।
बृहस्पतिवार को इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार यादव के न्यायालय में हुई। न्यायाधीश ने रामज्ञान सिंह को आजीवन कारावास एवं एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।