रमजान के दौरान मांग की तुलना में नहीं हो रही है मंडी में आवक, खरबूज, तरबूज के थोक और फुटकर दामों में भी दोगुने का अंतर
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। रमजान के बीच राहत पहुंचाने वाले नींबू के दाम बढ़ गए हैं। वहीं, गले को तरावट देने वाले तरबूज और खरबूज भी पीछे नहीं हैं। इनके भी दाम फुटकर बाजार में आसमान छु रहे हैं।
नगर की मंडी में आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से आने वाले नींबू की आवक इन दिनों मांग की तुलना में आधे से कम हो रही है। सीजन में एक से दो रुपये पीस बिकने वाला नींबू इन दिनों थोक मंडी में पांच से छह रुपये पीस बिक रहा है।
फुटकर बाजार में दुकानदार मुनाफा वसूलते हुए इसे 10 से 12 रुपये पीस बेच रहे हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही तरबूज, खरबूज और खीरे की थोक और फुटकर बाजारों में मांग बढ़ गई है। तरबूज थोक मंडी में आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से आ रहा है। थोक में इनकी कीमत 13 से 14 रुपये है, जबकि फुटकर बाजार में इसे 35 से 40 रुपये किलो बेचा जा रहा है।
रविवार को थोक मंडी में खरबूज 24 से 26 रुपये किलोग्राम बिक रहा है। वहीं फुटकर बाजार में खरबूज का दाम 40 से 45 रुपया किलोग्राम था। खीरे की आपूर्ति स्थानीय स्तर पर हो रही है। ऐसे में इसके दाम कम हैं। मंडी में खीरा 12 से 15 रुपये किलोग्राम है, जबकि फुटकर में 20 से 25 रुपये किलोग्राम है।
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थोक और फुटकर दाम
थोक (रुपये में) फुटकर
नींबू पांच से छह 12 से 15 रुपये प्रति पीस
खरबूज - 24 से 26 40 से 45 रुपये प्रति किलो
तरबूज - 13 से -14 35 से 40 रुपये प्रति किलो
खीरा - 12 से 15 20-25 रुपये प्रति किलो
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दुकानदार बता रहे हैं कि नींबू का सीजन नहीं है, लेकिन रमजान और गर्मी बढ़ने के कारण नींबू की मांग आवक की तुलना में काफी बढ़ गई है। इससे दाम भी दो से तीन गुना हो गया है।
सुधीर जायसवाल, पडरौना
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गर्मी के मौसम में नींबू, तरबूज और खीरा का प्रयोग अधिक करते हैं। दुकानदार बता रहे हैं कि जिले में महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश से तरबूज की आवक होती है। इसीलिए इसके भाव ज्यादा हैं। त्योहार के कारण फलों के दाम बढ़ गए हैं।
- सतीश जिंंदल, पडरौना।
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खीरा और नींबू का सलाद में इस्तेमाल होता है। गर्मी के मौसम में लोग इसे खाना पसंद करते हैं। लेकिन इसके दाम अधिक होने से इसकी खरीदारी करने के लिए अधिक पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
कविता बगाड़िया, गृहिणी
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गर्मी के मौसम में तरबूज और खीरा बच्चों की पहली पसंद होती है। बाजार में इसके दाम अधिक होने के चलते सामान्य परिवार के लोगों की पहुंच से दूर है।
रेशमी टिबड़ेवाल, गृहिणी