खड्डा। फाइनेंस कंपनी का कर्ज चुकाने में असमर्थ दलित मजदूर की खुदकुशी के मामले में उसकी पत्नी फाइनेंस कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कानूनी मदद लेगी। शनिवार को उनका कहना था कि फाइनेंस कंपनी के एजेंटों के दबाव से तंग आकर उनके पति ने आत्मघाती कदम उठाया है। बड़ा बेटा बाहर रहता है। वह घर लौट रहा है। उसके आने के बाद पुलिस से शिकायत की जाएगी। दोषियों पर कार्रवाई के लिए कानूनी मदद लूंगी। परिवार की माली हालत इतनी खराब है कि चंदा जुटाकर मजदूर का दाह संस्कार किया गया।
नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के सिसवा गोइती गांव निवासी 55 वर्षीय रामजी प्रसाद खड्डा थाना क्षेत्र मठिया बुजुर्ग गांव में परिवार के साथ रहते थे। बेटी की शादी के अलावा अन्य कार्यों के लिए सात माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लिया था। ब्याज समेत ऋण तीन लाख से अधिक हो गया था। समूह के माध्यम से दिए गए कर्ज की वसूली के लिए फाइनेंस कंपनी के एजेंट दरवाजे पर पहुंच रहे थे। इसको लेकर विवाद भी होता था। कर्ज चुकाने की चिंता में बुजुर्ग मजदूर ने बृहस्पतिवार की रात जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर घर वाले तुर्कहा सीएचसी पर ले गए। हालत गंभीर देख डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव दरवाजे पर पहुंचा तो परिजनों के पास कफन और लकड़ी तक के लिए पैसे नहीं थे। तीन घंटे तक शव दरवाजे पर रखा रहा। इसकी जानकारी होने के बाद गांव के प्रधान प्रतिनिधि संतोष यादव और अन्य लोग पहुंचे और चंदा जुटाकर दिया। इसके बाद शव को दाह संस्कार के लिए परिजन लेकर गए। आंखों में आंसू लिए ज्ञानती देवी ने बताया कि बड़ा बेटा बाहर रहकर काम करता है। पिता की मौत की जानकारी होने के बाद घर के लिए चल दिया है। देर रात तक आ जाएगा। समूह के ऋण लेते समय बीमा की धनराशि फाइनेंस कंपनी वालों ने ली थी। उसी रुपये से कर्ज चुकता करूंगी। दूसरा कोई रास्ता नहीं है। बेटे के आने पर कानूनी मदद भी लूंगी।