कसया। पितृ पक्ष में पितरों के पूजन और उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करने की परंपरा है। इस दौरान बहुत से लोग वृद्धाश्रम जाकर भी दान देते हैं, बुजुर्गों के साथ समय बिताने के अलावा उनके साथ भोजन कर उनकी पसंद की चीजें उपहार स्वरूप देते हैं। इसके लिए हर साल की तरह बाकायदा एडवांस बुकिंग भी शुरू हो गई है।
लेकिन दूसरी ओर वृद्धाश्रमों में बढ़ती बुजुर्गों की तादाद बताती है कि जीते जी उनका तिरस्कार उनके बच्चे हो कर रहे हैं। नगर के गोरखपुर रोड स्थित वृद्धाश्रम में की बात करें, तो न सिर्फ वहां रहने वाले बुजुर्गों ने बल्कि शेल्टर होम के संचालकों ने भी एक ही बात कही कि यहां आकर बुजुर्गों की सेवा करना पुण्य कार्य है। जीवित रहते अगर मां-बाप की सेवा उनके बच्चे करें तो उन्हें वृद्धाश्रम में आकर अपनी जिंदगी की शाम नहीं गुजारनी पड़ेगी। एक ओर जीवित माता- पिता का तिरस्कार और दूसरी ओर वृद्धाश्रम में दान के लिए कतार का विरोधाभास बताता है कि समाज में बुजुर्गों की उचित देखभाल कितनी जरूरी है।
मनपसंद वस्तुएं भी पूछकर दे जाते दान
नगर के वृद्धाश्रम की प्रबंधक रज्जू राजा ने बताया कि उनके यहां 116 बुजुर्गों का रजिस्ट्रेशन है। वर्तमान में 95 बुजुर्ग रहते हैं। पितृ पक्ष में सामान्य दिनों की तुलना में लोग ज्यादा दान देते हैं। बुजुर्गों से पूछकर भी उनकी पसंद की चीजें दे जाते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि माता-पिता की मनपसंद का जिंदा रहते सम्मान करें तो ज्यादा उचित रहेगा। अगर मां-बाप की जीवित रहते आप सेवा नहीं कर सकते तो उनकी मृत्यु के बाद कितना भी दान करते घूमें, उसका कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने बताया कि इस बार भी पितृपक्ष में दान की तादाद बढ़ी है, पहले ही लोग बुकिंग कर रहे हैं। पितृ पक्ष में दान ज्यादा आता है। गेहूं, दाल, चावल, दलिया, फल, कपड़े आदि लोग दे जाते हैं।अभी कल ही दही चिउड़ा का कार्यक्रम एक सज्जन किए थे। एडवांस बुकिंग में 24 सितंबर को किसी ने लंच तय किया है तो किसी ने 29 सितंबर का डिनर तय किया है।